बलरामपुर। भीषण गर्मी में हो रही बिजली कटौती से हाहाकार मच गया है। लोग गर्मी में रहने को लाचार दिख रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। कई क्षेत्रों में लो-वोल्टेज की वजह से बिजली के उपकरण भी ठीक से नहीं चल पा रहे हैं। जिला मुख्यालय पर भी प्रतिदिन दो से तीन घंटे अघोषित कटौती हो रही है। गर्मी के बीच बदहाल विद्युत व्यवस्था से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
विदित हो कि सरकार ने नगरों में 24 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 18 से 20 घंटे बिजली आपूर्ति करने का रोस्टर जारी किया है। भीषण गर्मी के बीच रोस्टर का कोई मतलब नहीं रह गया है। गांवों में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती की जा रही है। लोकल फाल्ट व ओवरलोड के कारण जगह-जगह ट्रांसफार्मर भी फुंक रहे हैं। 45 डिग्री से अधिक तापमान के बीच गांवों में आठ से 10 घंटे बिजली मिल पा रही है। कई इलाकों में बिजली तो आती है, लेकिन वोल्टेज इतना कम रहता है कि लोगों के पंखे व कूलर भी ठीक से नहीं चल पा रहे। बार-बार हो रही ट्रिपिंग से लोगों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है।
चौपट हो रहे हैं छोटे उद्योग
ग्रामीण इलाकों में पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण आटा चक्की, धान मशीन व आइसक्रीम बनाने वाले जैसे छोटे उद्योग पर्याप्त बिजली न मिलने के कारण चौपट हो रहे हैं। इन उद्योगों के संचालकों का कहना है कि डीजल इतना महंगा है कि जनरेटर या इंजन चलाकर उद्योगों का संचालन किया जाना नामुमकिन हो गया है। बिजली के सहारे उद्योग चल रहे हैं। पर्याप्त बिजली न मिलने से व्यापार में घाटा हो रहा है।
विभागीय अफसर नहीं उठाते फोन
ग्रामीण अशफाक अहमद, कृष्ण गोपाल सिंह, श्याम किशोर वर्मा तथा विवेक पांडेय आदि ने बताया कि शासन ने निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अधिकारियों का नंबर मदद के लिए जारी तो कराया था, लेकिन अधिकांश फीडर के अधिकारी तथा लाइनमैन या तो फोन बंद रखते हैं या फिर घंटी बजती रहती हैं, लेकिन फोन नहीं उठता।
बेहतर आपूर्ति का हो रहा प्रयास
भीषण गर्मी में बिजली की मांग काफी बढ़ गई है। शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में बेहतर आपूर्ति करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। सभी संबंधित अधिकारियों को उपभोक्ताओं की समस्याआं का तत्काल निस्तारण करने का निर्देश दिया गया है। ललित कुमार, अधीक्षण अभियंता पावर कारपोरेशन बलरामपुर