लुधारी निवासी बदरुद्दीन खान ने कहा कि जरवा भंसार के सक्रिय होने से आसपास के व्यापारी भी यहां आएंगे। यह मार्ग भारत-नेपाल के बीच सबसे कम दूरी वाला और सुविधाजनक है। यदि भंसार खोला गया तो यहां से निर्यात-आयात, कृषि उत्पादों और अन्य व्यापारिक सामानों का संचालन सुचारू होगा।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख हीरालाल यादव कहते हैं कि पहले इसी मार्ग से करोड़ों रुपये का व्यापार होता था, लेकिन राजनीतिक उदासीनता और माओवादी गतिविधियों के कारण यह मार्ग ठप हो गया। तब से क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ गई और लोगों का जीवन संघर्षपूर्ण हो गया। भंसार के खुलने से यह स्थिति बदल सकती है।
तरक्की का द्वार अभियान को सराहा
क्षेत्र के विशंभर यादव ने कहा कि हमारी समस्याओं को प्रमुखता से उजागर करने से राह आसान दिख रही है। यह उम्मीद जगाती है कि भंसार फिर से चालू होने पर यहां का जीवन और व्यापार दोनों बदल सकते हैं। तरक्की का द्वार अभियान इस क्षेत्र की आवाज को सामने ला रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भंसार शीघ्र शुरू होता है, तो न केवल व्यापार बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भंसार खुलने से ये होगा
1-व्यापार में वृद्धि : भारत-नेपाल के बीच निर्यात-आयात में आसानी होगी।
2-स्थानीय रोजगार: व्यापार और परिवहन के नए अवसर बनेंगे।
3-कृषि उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग : किसानों को सीधा लाभ। नेपाल में सप्लाई आसान होगी।
4-समय और खर्च की बचत : छोटे और बड़े व्यवसायी, दोनों के लिए यह भंसार राहत वाला होगा।
5-सामाजिक और आर्थिक विकास: पिछड़े इलाके में शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं का लाभ होगा।
बलरामपुर के जरवा में स्थित भारत-नेपाल सीमा प्रवेश द्वार ।-संवाद
बलरामपुर के जरवा में स्थित भारत-नेपाल सीमा प्रवेश द्वार ।-संवाद
बलरामपुर के जरवा में स्थित भारत-नेपाल सीमा प्रवेश द्वार ।-संवाद
बलरामपुर के जरवा में स्थित भारत-नेपाल सीमा प्रवेश द्वार ।-संवाद
बलरामपुर के जरवा में स्थित भारत-नेपाल सीमा प्रवेश द्वार ।-संवाद
बलरामपुर के जरवा में स्थित भारत-नेपाल सीमा प्रवेश द्वार ।-संवाद
बलरामपुर के जरवा में स्थित भारत-नेपाल सीमा प्रवेश द्वार ।-संवाद