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Balrampur News: ईको टूरिज्म थारू समाज के जीवन में ला रहा उजाला

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बलरामपुर के जरवा में पर्यटकों के लिए लगा सांकेतिक बोर्ड ।-संवाद
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जरवा। नेपाल सीमा से सटा जरवा अब सिर्फ घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए नहीं जाना जा रहा। यहां की हरियाली में अब उम्मीदों की नई कोंपलें फूट रही हैं। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के रामपुर रेंज में बना ईको टूरिज्म स्थल और दारा नाला नेचर ब्यूटी पॉइंट स्थानीय ग्रामीणों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिख रहा है।
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लव सेल्फी प्वाइंट, झरनों की कलकल आवाज और घने वृक्षों के बीच से झांकती सूरज की किरणें इस स्थल को और भी मोहक बनाती हैं। लेकिन इस सुंदरता के पीछे है एक बदलाव की लहर, जो थारू समाज की महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। यहां पर नेपाल के नागरिक आ रहे हैं, इससे स्थानीय लोगाें का कारोबार भी बढ़ रहा है। सीमा पर व्यापारिक गतिविधियों के बीच पर्यटन विकास से एक नई आस लोगों में जगी है। बहुत वर्षों बाद लोग जिंदगी में बदलाव महसूस कर रहे हैं। मोहकमपुर, पहाड़पुर, सगरापुर, नवलगढ़ जैसे गांवों के युवाओं ने मिलकर अब पर्यटकों के स्वागत की नई पहल शुरू की है। थारू लोकनृत्य, पारंपरिक परिधान और हस्तनिर्मित उपहार अब आकर्षण का हिस्सा बन गए हैं। नेपाल के पर्यटक यहां के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ थारू संस्कृति के अनुभव से बेहद प्रभावित हैं।
बांस और बाजरे से बदली जिंदगी
ग्राम मोहकमपुर की पूजा थारू कभी घर तक सीमित थीं। अब वे बांस से टोपी और बाजरे के लड्डू बनाकर आने वाले सैलानियों को बेचती हैं। पूजा मुस्कराते हुए बताती हैं कि पहले सोचती थी कि जंगल से हमें क्या मिलेगा। अब यहीं से रोजगार मिला है। हमारे बनाए लड्डू और टोपी पर्यटक खुशी से खरीदते हैं। बच्चों की पढ़ाई का खर्च अब खुद उठा पा रही हूं। पूजा जैसी कई महिलाएं अब छोटे-छोटे समूहों में मिलकर थारू सभ्यता से जुड़े उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बिक्री से घरों में खुशहाली लौट आई है।
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रोजगार और पहचान का नया रास्ता
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शकील खान बताते हैं कि ईको टूरिज्म ने जरवा क्षेत्र की तस्वीर ही बदल दी है। पहले लोग यहां से काम की तलाश में बाहर जाते थे, अब बाहर से लोग यहां आने लगे हैं। रामपुर रेंज के रेंजर प्रभात वर्मा कहते हैं कि वन विभाग की कोशिश है कि थारू समाज के लोग पर्यटन विकास की मुख्यधारा में शामिल हों। महिलाओं को प्रशिक्षण देकर हस्तशिल्प, पारंपरिक खाद्य पदार्थ और सजावटी वस्तुएं बनाने का हुनर सिखाया जा रहा है।
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थारू उत्पादों की शान, परंपरा और प्रकृति का संगम
- बांस की टोपी, लकड़ी के खिलौने और हस्तनिर्मित आभूषण
- बाजरे के लड्डू, स्थानीय अन्न से बने खाद्य पदार्थ
- थारू लोकनृत्य और लोककला का प्रदर्शन
- सीमावर्ती बाजारों में थारू उत्पादों की बढ़ती मांग
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