बलरामपुर। जिले में मनरेगा के तहत काम करने वाले सभी सक्रिय मजदूरों की ई केवाईसी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत अब मजदूरों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे जीवित हैं और स्वयं कार्यस्थल पर उपस्थित हैं। यह प्रक्रिया सरकारी पेंशनरों जैसी ही है, जिसका उद्देश्य फर्जीवाड़ा और प्रॉक्सी मजदूरों की समस्या पर रोक लगाना है।
जिले में 2 लाख 18 हजार मजदूर मनरेगा में पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 90 हजार मजदूरों की ई केवाईसी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। सभी मजदूरों को नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) और आधार फेस प्रमाणीकरण एप का उपयोग कर ई केवाईसी पूरी करनी होगी।
ई केवाईसी में मजदूर का फेस प्रमाणीकरण किया जाएगा। इसमें सिर्फ फोटो नहीं, बल्कि पलक भी झपकानी होगी, ताकियह सुनिश्चित हो सके कि व्यक्ति जीवित है। प्रमाणीकरण के बाद जीवित होने का प्रमाणपत्र वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।
फर्जीवाडे़ पर लगेगी लगाम
मनरेगा कार्यों में कई बार फर्जी उपस्थिति और प्रॉक्सी मजदूरों की शिकायतें सामने आती रहती हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद कार्यस्थल पर ही फेस प्रमाणीकरण होगा, जिससे असली मजदूर मौजूद न होने पर उपस्थिति दर्ज नहीं होगी और भुगतान संभव नहीं होगा।
- सुशील कुमार अग्रहरि, उपायुक्त श्रम रोजगार