शहर के जिस माेहल्ले में आरक्षी किराए पर रहती है, वहां के एक व्यक्ति ने बताया कि होली के बाद कुछ सिपाही और कुछ महिलाएं घर पर दिखाई दी थीं। उन लोगों को ज्यादा मतलब नहीं था, इसलिए कोई जानकारी नहीं की। अब जब मामला चर्चा में आया तो पता चला कि महिला आरक्षी को धमकाने के लिए दीवान पहुंचा था। इस बार वह पत्नी को भी साथ लाया था।
मोहल्ले के ही एक युवक ने बताया कि दीवान सिपाही से कह रहा था कि एक बार और माफ कर दो, अगर मैं फंसा तो फंसाऊंगा जरूर। इस तरह शिकायत के बाद से ही महिला आरक्षी पर दबाव बनाने का प्रयास होता रहा। यह अलग बात रही कि अधिकारियों पर भरोसा होने के कारण महिला आरक्षी अपनी शिकायत से पीछे नहीं हटी।
लेकिन आठ महीने तक जांच पूरी न होने और आरोपियों के धमकाने पर उसने राज्य महिला आयोग में शिकायत की, जिसके बाद मामला चर्चा में आया। अब विभागीय जांच तेजी से हो रही है।
पूरी होने वाली है जांच, जल्द कार्रवाई के संकेत
महिला आरक्षी से छेड़छाड़ मामले की जांच पूरी होने वाली है। एसपी विकास कुमार ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उच्चाधिकारियों ने भी कार्रवाई पर जोर दिया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच समिति पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है, एसपी खुद अब निगरानी कर रहे हैं। आरोपियों का बचना मुश्किल है। बीते दिनों कई मामलों में पुलिस अधीक्षक की तेजी से कार्रवाई चर्चा में रही है। इस मामले में रिपोर्ट नहीं मिलने से कार्रवाई नहीं हो सकी थी। जांच आंतरिक और संवेदनशील है, इससे ज्यादा कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
महिला कर्मियों की सुरक्षा जरूरी
-महिला कर्मियों की सुरक्षा के लिए सभी विभागों के अधिकारियों को सजग रहना चाहिए। पुलिस विभाग में तो विशेष प्रयास करना चाहिए। महिला आरक्षी से छेड़छाड़ मामले में गंभीर कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे ऐसे मनबढ़ कर्मियों को सबक मिले। अन्य महिला आरक्षियों को भी सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। कई मामले सुनने में आए हैं, ऐसे में कार्रवाई के साथ ही एक व्यवस्था भी बने जिससे नियमित महिला आरक्षी अपनी समस्या बता सकें।
उर्मिला सिन्हा, सामाजिक कार्यकर्ता