बलरामपुर। स्कूल जाने में असमर्थ दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई अब उनके घर पर ही होगी। इसकी जिम्मेदारी 23 स्पेशल एजुकेटर को सौंपी गई है। यह दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई कराने के साथ ही उनकी सेहत को भी बेहतर बनाने का पूरा ध्यान रखेंगे। स्कूल जाने में अक्षम ऐसे 115 दिव्यांग बच्चे अब तक चिन्हित हुए हैं।
होम बेस्ड एजूकेशन योजना के तहत प्रत्येक एजुकेटर को पांच- पांच दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन बच्चों के घर जाकर उन्हें प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी। इसमें विशेषतौर से ऐसे दिव्यांग बच्चों को चिह्नित किया गया है जो दिमागी बुखार से पीड़ित होने के कारण शरीर से उठने- बैठने में सक्षम नहीं होंगे। ऐसे बच्चों को विशेष उपकरण भी प्रदान किए जाएंगे।
स्पेशल एजुकेटर कमलेश बहादुर सिंह कहते हैं कि यह योजना काफी कारगर है। दिव्यांंग बच्चों को तो स्कूलों में पंजीकृत कराकर पढ़ाई हो जाती है लेकिन ऐसे अत्यंत दिव्यांग बच्चों को उनके घर पर शिक्षा दी जा रही है। इसके लिए उन बच्चों की पढ़ाई से जरूरी सामग्री भी दी जाएगी।
- गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चाें को पढ़ाई के लिए कई तरह की सामग्री भी दी जाएगी। इसमें वुडेन प्लास्टिक के विभिन्न मॉडल, अंग्रेजी व हिंदी में अल्फाबेटिक, नंबर आकार, आकृतियों का पजल, शरीर के अंग, फल, सब्जियों के साधनों का चार्ट, विभिन्न प्रकार के बोर्ड, म्यूजिकल इक्विपमेंट, किचन व डॉक्टर सेट, विभिन्न प्रकार के पिक्टोरियल चार्ट्स, लाइट प्रोड्यूसिंग खिलौने इत्यादि शामिल होंगे। साथ ही ऐसे बच्चों के अभिभावकों को साल में छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी पालन पोषण के लिए मिलेगी।
जिला समन्वयक समेकित शिक्षा आभा त्रिपाठी ने बताया कि होम बेस्ड एजूकेशन से अत्यंत दिव्यांग बच्चों को उनके घर पर शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। इससे शिक्षा से छूटे बच्चों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है। उनकी सेहत की जांच व इलाज की व्यवस्था भी की जाएगी।