तुलसीपुर/जरवा(बलरामपुर)। सीमापार से नकली करेंसी का धंधा चल रहा है। मुखबिर की सूचना पर एसएसबी तथा पुलिस की संयुक्त टीम ने नेपाल से नकली करेंसी लेकर भारत आ रहे बाइक सवार तस्कर को दबोच लिया।
तस्कर का साथी भागने में सफल रहा। उसके पास से कुल चार लाख 6 हजार रुपये की नकली करेंसी बरामद हुई है। सभी नोट दो हजार रुपये के हैं तथा सबका सीरियल नंबर भी एक है।
पुलिस ने तस्कर के खिलाफ केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है। एसपी बलरामपुर प्रमोद कुमार तथा एसएसबी 9वीं वाहिनी के उप कमांडेंट अमित सिंह ने बताया कि तुलसीपुर के पिपरहवा चौराहे पर दो बाइक सवारों को रोका गया।
एसएसबी तथा पुलिस को देख दोनों बाइक सवारों ने भागने की कोशिश की। टीम ने घेराबंदी की तो एक व्यक्ति बाइक सहित पकड़ लिया गया। दूसरा साथी चकमा देकर भागने में सफल रहा।
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान राम दयाल(27) पुत्र सुखराम निवासी धनधरा थाना तुलसीपुर बलरामपुर के रूप में हुई है। यह लोग चकमा देने के लिए बाइक पर विदिशा ब्रांड डिटर्जेंट केक की 87 टिकिया बोरी में लिए हुए थे।
राम दयाल की जेब से चार लाख 6 हजार रुपये के नकली नोट बरामद हुए हैं। सभी नोट दो हजार के हैं तथा सबका सीरियल नंबर भी समान है।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह यह नकली करेंसी नेपाल से लेकर भारत आ रहा था। भारत में उसे यह करेंसी किसी के हवाले करनी थी।
पुलिस ने आरोपी के साथी तथा नकली करेंसी रिसीव करने वाले व्यक्ति के नाम का खुलासा नहीं किया है। सीओ तुलसीपुर डीएन त्रिपाठी तथा इंस्पेक्टर एसके त्रिपाठी ने बताया कि राम दयाल के खिलाफ केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
तस्करों के लिए वरदान है नेपाल की खुली सीमा
बलरामपुर। जिले से सटी हुई लगभग 82 किमी नेपाल की खुली सीमा तस्करों के लिए वरदान साबित हो रही है। पगडंडी रास्तों से तस्कर चरस, गांजा, हेरोइन, नकली करेंसी व हथियार आदि नेपाल से भारत ले आते हैं।
यही नहीं, इन पगडंडी रास्तों से मानव तस्करी को भी अंजाम दिया जाता है। नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की कड़ी निगरानी के बावजूद तस्कर आए दिन चकमा देकर अंदर तक पहुंच रहे है।
इन तस्करों को गाइड भारत में बैठे मास्टर माइंड करते हैं। नेपाल से बलरामपुर के रास्ते लाया जाने वाला तस्करी का सामान हिमाचल प्रदेश व कानपुर पहुंचाया जाता है।
यह भी कहा जाता है कि तस्करी के मास्टर माइंड हिमाचल प्रदेश व कानपुर में बैठकर अवैध काम को अंजाम देते हैं। पकड़े जाने वालों को कैरियर बताया जाता है।
आज तक पुलिस तस्करी के पीछे लगे मास्टर माइंड को नहीं ढूंढ पाई है। अब सवाल यह उठता है कि तस्करों को संरक्षण देने वाले मास्टर माइंड आखिर पुलिस व खुफिया एजेंसियों की पकड़ में क्यों नहीं आ रहे।
हर बार तस्करों को पकड़ने के बाद यह कहा जाता है कि आकाओं की छानबीन की जा रही है। आका कब पकड़ में आएंगे यह यक्ष प्रश्न अभी भी बना हुआ है।