बलरामपुर/जरवा। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती तथा बार-बार होने वाले लोकल फॉल्ट से उपभोक्ता परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे के बावजूद कई क्षेत्रों में महज 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है।
नेपाल सीमा से सटे जरवा क्षेत्र के सैकड़ों गांव इन दिनों गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। कोयलावास फीडर से जरवा से लेकर बघेलखंड तक बिजली आपूर्ति की जाती है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि निर्धारित 18 घंटे के बजाय केवल चार से पांच घंटे ही बिजली मिल रही है। इससे नाराज ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर आपूर्ति व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की।
ग्रामीण रहीम, गफ्फार, जग्गू, अशोक यादव, बेकारू साहू, राजेश कनौजिया, मकबूल, सलमान, लल्लू खान, मोहम्मद शकील, जगदंबा, रघुनंदन, बशीर और मनीराम ने बताया कि जंगल से होकर गुजरने वाली बिजली लाइन में आए दिन तकनीकी खराबियां आती रहती हैं, जिससे आपूर्ति लगातार बाधित होती है। इसका असर जरवा, मोहकमपुर, कन्हईडीह, बेतहनिया, पहाड़ापुर, रनियापुर, बालापुर, नेवलगढ़, जुगनभरिया, चैनपुर, निश्चलडीह, कुढोहा, सिसई, सेमरी, जनकपुर, भगवानपुर, बघेलखंड, बानगाई और विश्रामपुर समेत करीब 20 गांवों पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि रात में बिजली न रहने से पूरे क्षेत्र में अंधेरा छा जाता है। इससे जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है और लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
उधर, जिला मुख्यालय पर भी शुक्रवार को सिविल लाइन, पहलवारा, मुख्य बाजार और पूरबटोला क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। कलेक्ट्रेट मोड़ के आसपास दिनभर लो वोल्टेज की समस्या बनी रही। 33 केवी लाइन के पोलों की साफ-सफाई के लिए सिविल लाइन फीडर करीब ढाई घंटे बंद रखा गया। वहीं, घासमंडी के पास ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग के कारण भी कुछ समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। उपभोक्ता करुणेश, महेश, अशोक और फिरोज ने कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद बिजली व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। इस संबंध में जूनियर इंजीनियर (जेई) दयाराम ने बताया कि तकनीकी समस्याओं को दूर कर बिजली आपूर्ति में जल्द सुधार कराया जाएगा।