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भारत और नेपाल के बीच मैत्री संबंधों को मजबूत कर गए सीएम

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बलरामपुर। शुक्रवार को देर शाम देवीपाटन शक्तिपीठ तुलसीपुर में आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने भारत और नेपाल सदियों पुराने धर्म-संस्कृति और रोटी-बेटी के संबंधों की याद ताजा कर गए।
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विदित हो कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना रोटी-बेटी का संबंध है। एक-दूसरे देश के लोग हिंदू धर्म स्थलों की सच्चे मन से श्रद्धा रखते हैं। बीते वर्षों में चीन की कूटनीति के कारण भारत और नेपाल के संबंध में खटास आई थी। यह खटास अब धीरे-धीरे मिठास में बदलने लगी है।
नाथ संप्रदाय का नेपाल विशेष महत्व है। नेपाल में कई मठ, मंदिरों के लोग आज भी भारत में चार धाम यात्रा करने आते हैं। देवीपाटन शक्तिपीठ के ब्रह्मलीन महंत महेंद्र नाथ योगी की श्रद्धांजलि में आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ नेपाल के विभिन्न मठों से आए संतों के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि भारत और नेपाल भले अलग देश हों लेकिन धर्म और संस्कृति के नाम पर दोनों की आत्मा एक है।
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अपने संबोधन में सीएम बार-बार नेपाल स्थित भगवान पशुपतिनाथ तथा भारत स्थित चार धाम का जिक्र कर यह बताने की कोशिश की थी दोनों देशों की धर्म और संस्कृति की आत्मा एक है। उन्होंने यह भी कहा धर्म समाज को आदर्श और सदाचार सिखाता है।
आदर्श और सदाचार के बगैर धरती पर रहने वाला मनुष्य जानवर के समान है। संतो को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री का यह संदेश भारत ही नहीं बल्कि नेपाल के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने कहा कि संत का मतलब यह नहीं कि वह केवल पूरा जीवन अपने इष्ट की पूजा और अर्चना बिताए बल्कि संत का अर्थ यह होता है की पूजा अर्चना के साथ-साथ लोगों के कल्याण के लिए जीवन पर्यंत काम करें। उनके इस संबोधन भारत के लिए नहीं बल्कि नेपाल संतो भारी खुशी देखने को मिली। संवाद
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