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Balrampur News: कांपते हाथों से रिश्तों की डोर को मजबूत बना रहे बच्चे

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लखनऊ। सेरेब्रल पाल्सी की वजह से मिथुन के हाथ भले कांपते हों इन्ही कांपते हाथों से वह रिश्तों की डोर को मजूबत बना रहा है। सिर्फ मिथुन ही नहीं, उसके जैसे 22 और बच्चे हैं जो बौद्धिक और शारीरिक अक्षमताओं के बाद भी खूबसूरत राखियां बना रहे हैं। ये बच्चे आशियाना स्थित जीवन ज्योति समाज सेवा संस्थान में संस्थापक सुखमी लाल(एस लाल) के मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं।
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सुखमी लाल बताते हैं कि वह 32 सालों से बौद्धिक दिव्यांग बच्चों की मदद करने का काम कर रहे हैं। एक दिन उन्हें ख्याल आया कि अगर ये बच्चे कुछ हुनर सीखेंगे तो इनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और ये आत्मनिर्भर भी बनेगें। इसी सोच के साथ करीब 4 साल पहले उन्होंने बच्चों को नए-नए हुनर सिखाने शुरू किए और आज ये बच्चे ना सिर्फ सुंदर राखी बना रहे हैं बल्कि बाजार में बेचते भी हैं। राखी के अलावा ये बच्चे भगवान बाल गोपाल की पोशाक और मालाएं भी तैयार करते हैं।



समाज का साथ जरूरी-

बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को लेकर एस लाल ने बताते हैं कि ये बच्चे भले ही मानसिक रुप से कम समझदार हैं मगर भावनाओं को समझते हैं। इन्हें काफी हद तक ठीक भी किया जा सकता है। मगर उसमें समाज और परिवार दोनों की भूमिका अहम है। अगर समाज हमारा सहयोग करेगा तो यही बच्चे आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जिएंगें।
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