बलरामपुर। जिले में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। साइबर ठग ने खुद को बेसिक शिक्षा विभाग का अधिकारी बताकर एक महिला शिक्षिका से 40 हजार रुपये ठग लिए। घटना ने यह भी उजागर किया है कि ठग को पीड़िता की व्यक्तिगत व सेवा संबंधी जानकारी पहले से थी, जिसका फायदा उठाकर उन्हें निशाना बनाया गया।
हरैया सतघरवा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खैरहवा की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रश्मि सिंह के अनुसार, वह 9 मार्च से 19 मार्च तक चिकित्सीय अवकाश पर थीं। इसी बीच 18 मार्च की सुबह करीब 9 बजे उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को बीएसए कार्यालय से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ शिकायत आई है और उच्चाधिकारियों से बात करनी है।
कुछ ही देर में उसी व्यक्ति ने स्वयं को बीएसए बताकर बात की और निलंबन की चेतावनी देते हुए मानसिक दबाव बनाया।
ठग ने कहा कि यदि वह कार्रवाई रुकवाना चाहती हैं तो तुरंत 40 हजार रुपये ऑनलाइन भेजें। डर और तनाव में आकर शिक्षिका ने भेजे गए बार कोड पर रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में जब उन्होंने बीएसए कार्यालय से जानकारी की, तो पता चला कि वहां से कोई कॉल नहीं की गई थी। तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। पीड़िता ने इस संबंध में बीएसए शुभम शुक्ल से शिकायत की है और ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन किया है।
प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, ठगों को यह जानकारी थी कि शिक्षिका अवकाश पर हैं, जिससे शक गहराता है कि इस घटना में किसी परिचित या विभागीय जानकारी रखने वाले व्यक्ति की भूमिका हो सकती है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
जिले में साइबर ठगों की गहरी है पैठ
साइबर ठगों की पैठ जिले में गहरी है। इसका खुलासा बीते वर्ष 2025 में पुलिस ने किया था। जिसमें साइबर ठग जिले के लोगों से खाते और मोबाइल नंबर खरीदकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी कर रहे थे। इसकी जांच में दिल्ली का गिरोह पकड़ में आया है और करीब 19 लोग गिरफ्तार भी हुए। 300 करोड़ के करीब के साइबर ठगी का मामला उजागर हुआ था। इसके बाद भी साइबर ठगी के 13 और मामले सामने आए, जिनकी जांच हो रही है। अब प्रभारी प्रधानाध्यापक के मामले से एक बार फिर किसी गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं।
ऐसे बचें साइबर ठगी से
अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय ने बताया कि लोग सतर्क रहें। किसी भी अज्ञात कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें। कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर पैसे की मांग नहीं करता। डर या दबाव में आकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन न करें। संदिग्ध कॉल आने पर संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर पर पुष्टि जरूर करें। बारकोड/क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले उसकी सत्यता जांच लें। अपने बैंक और व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा न करें। ठगी का शक होते ही तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।