बलरामपुर। स्थानीय ब्लॉक में 48 साल बाद सरहद निर्धारण में सीमा स्तंभ लगाने की तैयारी हो रही है। गांवों में सीमा स्तंभ बनाकर समूह की 11 महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। 1100 सीमा स्तंभ बनाने में समूह की महिलाओं को 15 लाख 56 हजार 500 रुपये मिलेंगे। सीमा स्तंभ समूह की महिलाएं आर्थिक समृद्धि से रोशन होंगी। वर्ष 1976 में चकबंदी हुई थी, तब गांवों में सीमा स्तंभ लगाए गए थे। गांवों में सीमा स्तंभ गायब होने के बाद लोगों के बीच भूमि को लेकर विवाद बढ़ने लगा है। राजस्व कर्मियों को सीमांकन में काफी कठिनाई हो रही है। राजस्व विभाग ने अब नए सीमा स्तंभ लगाने का निर्णय लिया है। ऐसे में अब सरहद पर सीमा स्तंभ लगने से आपसी विवाद कम होंगे।
इनको मिली जिम्मेदारी
सीमा स्तंभ बनाने के लिए शिव सदगुरु भगवान महिला स्वयं सहायता समूह गैड़ास बुजुर्ग की महिलाओं को जिम्मेदारी दी गई है। समूह की अध्यक्ष मंजू देवी ने बताया कि एक सीमा स्तंभ बनाने पर महिला को 1415 रुपये दिए जाएंगे। सीमा स्तंभ बनाने में बालू व सीमेंट का खर्च आएगा। गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक में समूह की महिलाओं को 1100 सीमा स्तंभ बनाने का लक्ष्य मिला है। बांकभवानी में 25, कैथोलिया सलेमपुर में 10, गैड़ास बुजर्ग में चार, पिरैला माफी में पांच, पिड़िया बुजुर्ग में 39, कुशहवा में 84, दुधरा में 48, करमहिया में 42, भितवरिया में 32, धौरहरा में 34, बंजरिया में 20, अमहवा में 26, गजपुर ग्रंट में 22, इटईरामपुर पूर्वी में 12 व हुसैनाबाद ग्रिंट में 28 स्तंभ लगाने की राजस्व विभाग ने तैयारी की है।
महिलाओं को मिलेगा लाभ
ग्राम मगईपुर के किसान पंडोही प्रसाद जायसवाल ने बताया कि उनके गांव में वर्ष 1976 में चकबंदी हुई थी, तब गांव के सरहद पर सीमा स्तंभ लगाए गए थे। किसान सुखराम, मोहम्मद वकील, शकील अहमद व अब्दुल हकीम ने बताया कि चकबंदी के समय जो सीमा स्तंभ लगाए गए थे, वह गायब हो चुके हैं। भूमि विवाद को कम करने में मदद मिलेगी और महिलाओं को रोजगार भी मिला है।
चकबंदी के समय गांवों में जो सीमा स्तंभ लगाए गए थे, वह मिट्टी में धंस गए हैं या गायब हो गए हैं। इससे सीमांकन प्रक्रिया बाधित हो रही है। सभी गांवों में सीमा स्तंभ लगाकर विवाद खत्म कराया जाएगा।
अवधेश कुमार, एसडीएम उतरौला