ललिया (बलरामपुर)। क्षेत्र के कठौवा पतझी गांव में चल रहे नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ के पांचवे दिन रक्तबीज व महिषासुर के संहार की कथा का वर्णन किया गया। असुरों का संहार होते ही मां दुर्गा के जयकारे से पूरा पंडाल गूंज उठा।
अयोध्या धाम से आए पंडित जय प्रकाश तिवारी ने कथा सुनाई कि रक्तबीज और महिषासुर भगवान शिव की कठोर तपस्या करते हैं। इससे खुश होकर भगवान शिव महिषासुर को आशीर्वाद देते हैं कि कन्या के अलावा उसे कोई मार नहीं सकता है। वहीं रक्त की जितनी बूंदें पृथ्वी पर गिरेंगी उतने ही रक्तबीज तैयार होंगे। भगवान शिव का आशीर्वाद पाकर रक्तबीज और महिषासुर चारों तरफ अत्याचार करने लगते हैं। उनके अत्याचार से चारों तरफ हाहाकार मच जाता है। सभी देवता आदि शक्ति की आराधना करते हैं।
आदि शक्ति देवी प्रसन्न होकर काली का रूप धारण कर रक्तबीज दैत्य का संहार करती हैं। मां दुर्गा के रूप में महिषासुर का वध कर माता असुरों के अत्याचार का खात्मा करती हैं। दोनों असुरों का वध होने से देवता आकाश से फूलों की बारिश करते हैं।
इस अवसर पर जय प्रकाश पासवान, ज्ञान चन्द्र तिवारी, छोटू तिवारी, अतुल तिवारी व हरी प्रसाद आदि मौजूद रहे।