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Balrampur News: खरझार नाले के पुल का एप्रोच धंसा, बेला गांव पर संकट

Tue, 02 Jul 2024 11:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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बलरामपुर। बाढ़ का संकट बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहां बेला गांव पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं, पहाड़ी खरझार नाले के पुल का एप्रोच मार्ग भी धंस गया है। अफसरों ने निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया है। राप्ती नदी का जलस्तर घटने से उतरौला व हरैया के गांवों में कटान तेज हो रही है।
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तराई क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण उफनाए पहाड़ी नाले के साथ ही राप्ती नदी का कहर भी बढ़ता जा रहा है। बेला गांव की तरफ नदी तेजी से कटान कर रही है। ग्रामीण उमेश यादव, राजेश, मंगल, शिवकुमार, सलाहुद्दीन ने बताया कि राप्ती नदी की कटान तेज है। यह गांव से 50 मीटर की दूरी पर बह रही है। तहसीलदार तुलसीपुर परमेश कुमार व बीडीओ तुलसीपुर राजीव मोहन त्रिपाठी ने बेला गांव में हो रहे कटान का निरीक्षणकर ग्रामीणों को काटन वाले क्षेत्र में न जाने की हिदायत भी दी गई है। वहीं, पहाड़ी खरझार नाले के दोनों तरफ तटबंध में जगह-जगह रेन कट होने से तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ है। पुल का एप्रोच मार्ग भी धंस गया है। अफसरों ने बाढ़ खंड के अधिकारियों को मरम्मत का निर्देश दिया है। सहायक खंड विकास अधिकारी सुनील कुमार आर्य, क्षेत्रीय लेखपाल कमल कुमार, श्याम सुंदर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मोतीपुर गोसाईं के पास पहुंचा नाला
हरैया सतघरवा। सदर तहसील के मोतीपुर गोसाईं गांव के पास खेतों में कचनी पहाड़ी नाला का बाढ़ पहुंच गया है। वहीं ग्राम पंचायत का डिहवा पुरवा बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। ग्रामीण भोला वर्मा ने बताया कि कचनी नाला इस समय उफान पर है। बाढ़ पानी निकालने के लिए नाली खुदवाया जाना था। लेकिन कुछ दबंगों द्वारा नाली खुदाई नहीं करने दिया गया। तहसीलदार सदर अखिलेश कुमार ने बताया कि मौके पर राजस्व टीम भेज कर जांच कराई जा रही है।
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राप्ती ने बढ़ाई परेशानी
उतरौला। राप्ती नदी का जलस्तर घट रहा है। इससे लालनगर, मिलौली, बाघाजोत, मटयारिया डीह, सुरहिया देवर, परसौना, गोनकोट, महुवधनी गांव में कटान चल रही है। वैसे बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। तहसीलदार शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिए 13 बाढ़ चौकी बनाई गई हैं। इन बाढ़ चौकियों पर राजस्व विभाग ,विकास विभाग व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की तैनाती रहेगी। 5 बाढ़ राहत केंद्र भी बनाये गये हैं। नाविकों,गोताखोरों व नाव की संख्या दस दस है। बाढ़ आपदा मित्र की संख्या 34 है। राहत केंद्र व बाढ़ राहत चौकियों पर 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती रहेगी।
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