गैसड़ी। पचपेड़वा क्षेत्र के मठवा गांव में बुधवार को खेलते-खेलते 10 माह का मासूम पानी से भरी बाल्टी में गिर गया। कुछ ही देर में डूबने से उसकी मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद घर में कोहराम मच गया।
पचपेड़वा क्षेत्र के मठवा निवासी मोहम्मद जाफर की बेटी गुड़िया की शादी कुछ ही दूर स्थित कोल्हई गांव निवासी फिदा मोहम्मद के साथ हुई है। उनका 10 माह का बेटा गुड्डू भी था। करीब 15 दिन पहले जाफर का बेटा बहन गुड़िया को मायके लेकर आया था। बुधवार की दोपहर जाफर, उनकी पत्नी, बेटी व परिवार के अन्य सदस्य घर में ही मौजूद थे। दोपहर करीब दो बजे खाना खाने के बाद गुड़िया हाथ धोने के लिए घर के बाहर लगे नल के पास गईं। बेटा भी उसके पीछे-पीछे चला गया, लेकिन गुड़िया ने ध्यान नहीं दिया और हाथ धोने के बाद अंदर चली गईं। करीब एक घंटे बाद जब मासूम कहीं नजर नहीं आया तो परिजनों से ढूंढना शुरू किया। ढूंढते हुए परिजन जब बाहर नल के पास पहुंचे तो पानी से भरी बाल्टी में मासूम सिर के बल पड़ा मिला। घर वालों ने उसे बाहर निकाला लेकिन वह बेसुध था। यह देख घर में कोहराम मच गया।
आनन-फानन परिजन उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पचपेड़वा पहुंचे। वहां चिकित्सक ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मामले की सूचना पाकर पिता फिदा मोहम्मद भी वहीं पहुंच गए। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां-बाप बदहवास हो गए, घर में कोहराम मच गया। मां-बाप और परिजन मासूम के शव से लिपटकर रोने लगे। उनकी चीखें सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। 10 माह की नन्ही जान की असमय मौत ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। सीओ ललिया डाॅ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिली है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहें। बच्चों को निगरानी में रखें। सूचना दर्ज कर ली गई है। किसी को किसी से कोई शिकायत नहीं है।
ढाई वर्ष पूर्व मासूम बेटी की हो गई थी मौत
बलरामपुर। फिदा मोहम्मद के घर यह मासूम ही इकलौता चिराग था। इससे पहले ढाई वर्ष पूर्व उनकी एक बेटी हुई थी, लेकिन जन्म के कुछ ही दिन बाद बीमारी ने उसकी जिंदगी छीन ली थी। उस दर्द को परिवार अभी पूरी तरह भुला भी नहीं पाया था कि नियति ने उनसे उनका बेटा भी छीन लिया। मासूम की मौत से मां-बाप को गहरा सदमा है। बच्चे के गम में मां बार-बार बेहोश हो जा रही थी। गांव में महिलाएं उन्हें ढांढ़स बंधाने की कोशिश कर रही थीं।
बिखर गए परिवार के सपने
कोल्हुई गांव के फिदा मोहम्मद दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जैसे-तैसे मेहनत मजदूरी करके उनके घर का चूल्हा जलता है। आर्थिक तंगी के बीच भी परिवार बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के सपने संजोए जा रहा था। सपना था कि बेटे का स्कूल में दाखिला कराकर उसे पढ़ाए लिखाएंगे लेकिन, मासूम की मौत ने परिवार के सपने छीन लिए।