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मरीजे मिले न मिले, एंबुलेंस दौड़ाते रहिए

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बलरामपुर। स्वास्थ्य विभाग में एंबुलेंस संचालन में भी गोलमाल किया जा रहा है। जिले में संचालित 102 व 108 एंबुलेंस से हर 36 मिनट में एक केस अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। एबुलेंस संचालकों को मरीज मिले या न मिले, लेकिन एंबुलेंस दौड़ाने का निर्देश कार्यदायी संस्था की ओर से दिया गया है। परफॉर्मेस ठीक न होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी जा रही है। एंबुलेंस संचालन में हेरा-फेरी करके सरकार को करोड़ों रुपये का घालमेल किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
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जिले में जीवनदायिनी 108 व 102 की 50 एंबुलेंस संचालित है। एंबुलेंस कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह का कहना है कि कर्मचारियों पर प्रतिदिन 215 किलोमीटर एंबुलेंस चलाने का दबाव बनाया जा रहा है। प्रतिदिन कम से कम दो केस जिले से बाहर ले जाना अनिवार्य किया गया है। प्रतिदिन प्रति एंबुलेंस 25 से 40 मरीज को अस्पताल ले जाने का डाटा फीड किया जा रहा है। कार्यदायी संस्था की माने तो औसत हर 36 मिनट में एक मरीज को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। सवाल यह है कि जिले में हर एंबुलेंस को 36 मिनट में मरीज मिल रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ एंबुलेंस कर्मियों ने बताया कि उन्हें कार्यदायी संस्था की तरफ से हरहाल में दिए टारगेट को पूरा करना है। यदि कोई कर्मचारी दिए गए टारगेट पर कार्य नहीं कर पाता है तो उसे नौकरी से निकाल देने की धमकी दी जाती है। केस की संख्या और किलोमीटर का डाटा फीड कराना अनिवार्य है। 70 से 80 प्रतिशत रिपोर्ट फर्जी लगवाई जा रही है।
एक एंबुलेंस से 3-4 मरीज पहुंचाने का दावा
102, 108 एंबुलेंस के प्रोग्राम मैनेजर सचिन राय की माने तो एक एंबुलेंस से 3-4 मरीजों को अस्पताल एक साथ पहुंचाया जा रहा है। इस मामले में प्रोग्राम मैनेजर का कहना है कि कभी-कभी एक ही अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर होने वाले दो, तीन या चार मरीज होते हैं। ऐसे में उन सभी मरीजों को एक साथ एंबुलेंस में अस्पताल पहुंचा दिया जाता है। इतना ही नहीं एक रास्ते पर पड़ने वाले दो या तीन अस्पताल के मरीजों को भी ले जाया जाता है। सवाल यह उठता है कि एक ही मार्ग पर पड़ने वाले उतरौला सीएचसी से जिला संयुक्त अस्पताल के लिए गंभीर मरीज है और सीएचसी श्रीदत्तगंज का भी मरीज मिलता है तो पहले गंभीर मरीज को संयुक्त अस्पताल पहुंचाया जाएगा या फिर दूसरे मरीज को सीएचसी श्रीदत्तगंज में छोड़ने के बाद संयुक्त अस्पताल लाया जाएगा। अगर कार्यदायी संस्था के अधिकारियों की बात माने तो श्रीदत्तगंज में मरीज को छोड़ने और लिखा पढ़ी करने में जो समय लगेगा उसी दौरान गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज के साथ अनहोनी हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा ? दूसरी बात एक एंबुलेंस से 3 या 4 मरीज को लाया जाता है तो उसके खर्चे के बिल एक बनता है या फिर अलग-अलग, इस बात का जबाब भी सही ढंग से कार्यदायी संस्था के अधिकारी नहीं दे पा रहे हैं।
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मामले की कराई जाएगी जांच
एंबुलेंस में मरीजों को किस तरह से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है इस बात की जांच कराई जाएगी। यदि गलत डाटा फीड कराया जा रहा है या एंबुलेंस कर्मियों पर फर्जी डाला अपलोड करने का दबाव बनाया जाता है तो संबंधित संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ बलरामपुर
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