बलरामपुर के करगहिया में बना बाल वाटिका ।
बलरामपुर। जिले में कम नामांकन वाले विद्यालयों के विलय की व्यवस्था के बाद शिक्षकों पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है। उन्हें अपने नए विद्यालयों में पढ़ाने के साथ पुराने विद्यालयों की बाल वाटिका भी संभालनी होगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा के आदेश पर बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद से शिक्षकों में असमंजस है कि आखिर दो-दो जगह पढ़ाई कैसे कराई जाए।
जिले में हाल ही में 20 विद्यालयों का विलय किया गया है। इन विद्यालयों के लगभग 700 विद्यार्थियों को दूसरे विद्यालयों में संबद्ध कर दिया गया है। खाली हुए स्कूलों में अब बाल वाटिकाएं संचालित की जा रहीं हैं। आदेश के अनुसार इन बाल वाटिकाओं का संचालन आंगनबाड़ी वर्कर, शिक्षामित्र, सीईसी एजुकेटर और संबंधित विद्यालय के सहायक अध्यापक मिलकर करेंगे। खासतौर पर पांच से छह साल तक के बच्चों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी का कहना है कि जिन विद्यालयों में पहले से ही बाल वाटिकाएं चल रही हैं, वहां शिक्षक आसानी से देखभाल कर सकते हैं, लेकिन पुराने विद्यालयों की बाल वाटिका की जिम्मेदारी निभाना निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। सबसे बड़ी बात तो है कि जिन विद्यालयों में विलय के विद्यार्थी समायोजित हुए हैं, उनकी पढ़ाई कैसे होगी।
बीएसए शुभम शुक्ल ने कहा कि महानिदेशक से निर्देश मिले हैं। अभी बाल वाटिका का शुरुआती चरण है, इसमें शिक्षक गाइड की भूमिका में रहेंगे। बाद में एजुकेटर को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिसके बाद शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी से मुक्ति मिल जाएगी।