फोटो-17-बलरामपुर के मोहकमपुर गांव में रोते बिलखते मृतक के परिजन ।-संवाद
जरवा। नेपाल घूमने गए क्षेत्र के एक युवक की पहाड़ी नदी में डूबने से मौत हो गई। हादसा नेपाल के कोयलावास क्षेत्र में बुधवार शाम हुआ। युवक अपने दो दोस्तों के साथ नेपाल गया था। घटना की सूचना गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।
कोतवाली जरवा क्षेत्र के मोहकमपुर गांव निवासी विक्रम विश्वकर्मा का 19 वर्षीय बेटा अरविंद विश्वकर्मा बुधवार सुबह अपने दोस्तों निखिल पांडेय (19) और विवेक पांडेय (16) निवासी रमवापुर तुलसीपुर के साथ मोटरसाइकिल से नेपाल घूमने गए थे। बताया जाता है कि तीनों युवक दोपहर करीब 2:30 बजे कोयलावास बॉर्डर पर पहुंचे और नेपाल में एंट्री करने के बाद पहाड़ी नदी की ओर चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नदी किनारे पहुंचने के बाद तीनों नहाने लगे। इसी दौरान अरविंद गहरे पानी वाले कुंड में उतर गए। पहाड़ी नदी में तेज बहाव और फिसलन के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और वह अचानक गहराई में चले गए। बाहर मौजूद उसके दोनों दोस्त मदद के लिए शोर मचाने लगे। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और नेपाल पुलिस व एपीएफ को सूचना दी गई। स्थानीय लोगों की मदद से काफी देर बाद युवक को बाहर निकाला गया लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। नेपाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए लमही भेज दिया। घटना के बाद पुलिस ने मृतक के पिता विक्रम और रिश्तेदार अनुज को पूछताछ के लिए दांग थाने में रोक लिया है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि शकील खान ने बताया कि पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव भारतीय सीमा पर लाकर परिजनों को सौंप दिया जाएगा। प्रभारी निरीक्षक योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि घटना नेपाल के कोयलावास क्षेत्र की है। मामले की जांच और विधिक कार्रवाई नेपाल पुलिस कर रही है, नेपाल पुलिस से लगातार संपर्क बना है। घटना की सूचना पर महाराणा प्रताप जनजातीय संघ के अध्यक्ष मदन जयसवाल पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी।
बेटी की शादी की खुशियों के बीच घर में मातम छा गया
मोहकमपुर गांव का वह घर, जहां कुछ दिन पहले तक शादी के गीत गूंज रहे थे, अब वहां मातमी सन्नाटा पसर गया है। 25 अप्रैल को अरविंद की बहन की शादी हुई थी। परिवार अभी उसी खुशी में ही था, कि जवान बेटे की मौत की खबर ने सबकुछ बदल दिया। अरविंद की मां लक्ष्मी देवी बदहवास हालत में बार-बार बेटे का नाम लेकर रोती रहीं। वह रोते हुए कहती रहीं कि बेटी की शादी के लिए बाप-बेटा दोनों मजदूरी करते थे… अब मेरा बेटा वापस नहीं आएगा…। गांव के रमेश ने बताया कि परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर है। पिता विक्रम विश्वकर्मा दिहाड़ी मजदूर हैं। दो साल पहले उन्होंने बेटे अरविंद को अपने साथ चेन्नई ले जाना शुरू किया था, ताकि दो लोगों की मजदूरी से घर की जिम्मेदारियां संभाली जा सके। अरविंद पानी की फैक्ट्री में काम करता था और अपनी कमाई का ज्यादातर हिस्सा घर भेजता था। गांव वालों के मुताबिक अरविंद बेहद शांत और जिम्मेदार स्वभाव का लड़का था। सबसे बड़ा बेटा होने के कारण घर की उम्मीदें उसी पर टिकी थीं। अभी अरविंद की शादी भी नहीं हुई थी। उसकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। हर आंख नम थी और हर जुबान पर एक ही बात थी कि गरीब का सबसे बड़ा सहारा ही चला गया।
फोटो-17-बलरामपुर के मोहकमपुर गांव में रोते बिलखते मृतक के परिजन ।-संवाद