बलरामपुर। नगर में अक्षय नवमी पर बृहस्पतिवार को सप्तकोसी परिक्रमा में आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु जुटे। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं ने नगर के सभी प्रमुख मंदिरों का भ्रमण करते हुए पूजा-अर्चना की। गोदान व नगर परिक्रमा कर श्रद्धालुओं ने खुशहाली व सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा।
बलरामपुर राज परिवार की तरफ से 115 वर्ष पूर्व नगर परिक्रमा की शुरुआत की गई थी। जिले में पांच हजार से अधिक शिवालयों का निर्माण कराया गया था। शिवालयों की संख्या अधिक होने तथा नगर परिक्रमा के चलते बलरामपुर नगर को छोटी काशी के रूप में जाना जाता है। अक्षय नवमी के दिन निकलने वाले सप्तकोसी परिक्रमा यात्रा को सदर विधायक पल्टूराम, नगर पालिका अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह धीरू, राजेंद्र सिंह, डॉ. कुलदीप सिंह, डीपी सिंह, रघुनाथ अग्रवाल, संजय शर्मा, डॉ. तुलशीश दूबे, बाबादीन तिवारी और सोनू गिरी ने हरी झंडी दिखाकर झारखंडी मंदिर से रवाना किया।
परिक्रमा यात्रा झारखंडी मंदिर से निकलकर वीर विनय चौराहा व कालीथान होते हुए बिजलीपुर मंदिर पहुंची। यहां मां बिजलेश्वरी की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु रानी तालाब मंदिर, तुलसीदास पोखरा व नहर बालागंज होते हुए झारखंडेश्वर महादेव मंदिर धर्मपुर पहुंचे। भगवान शिव की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु गोशाला भगवतीगंज व संतोषी माता मंदिर होते हुए बलरामपुर राज महल नीलबाग पैलेस पहुंचे। यहां पर स्थित राधाकृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। राज परिवार की तरफ से परिक्रमा में शामिल सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। वहां से निकलकर परिक्रमा जुलूस पुन: झारखंडी मंदिर पहुंचा। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सप्तकोसी नगर परिक्रमा का समापन हुआ। इस अवसर पर उदायभान पांडेय, प्रीतपाल सिंह, अंबरीश शुक्ला, विनोद गिरि, लकी गुप्ता, निशांत चौहान, भानू तिवारी, आशीष चौहान व जय प्रकाश आदि मौजूद रहे।
नगरवासियों के लिए खुला राज परिवार का मंदिर
बलरामपुर रियासत के राजमहल नीलबाग पैलेस में स्थित राधाकृष्ण मंदिर आम जनता के लिए साल में केवल एक बार अक्षय नवमी के दिन खुलता है। दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला से परिपूर्ण इस मंदिर में राज परिवार के पुरोहित प्रतिदिन पूजा करते हैं, लेकिन आमजन को सिर्फ अक्षय नवमी के दिन ही राधाकृष्ण के दर्शन मिल पाते हैं। यहां दर्शन के बिना नगर परिक्रमा अधूरी मानी जाती है। इसी मान्यता के अनुरूप बृहस्पतिवार को परिक्रमा जुलूस राधाकृष्ण मंदिर पहुंचा तो पुरोहित ने श्रद्धालुओं को दर्शन कराए।