जरवा के हलौरा संग्रामपुर गांव में दिखा पगचिह्न।
जरवा। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग की तुलसीपुर रेंज के हलौरा संग्रामपुर गांव में बाघ के लिए लगा पिंजरा चौथे दिन भी खाली है। वन विभाग ने बृहस्पतिवार को पिंजरे में बकरी बांधकर बाघ को पकड़ने की कोशिश तेज कर दी है। ग्रामीण दहशत में हैं। बुधवार रात को बाघ नहीं आया।
ग्रामीण रफीक लाला, अब्दुल अहद, अब्दुल हमीद, जावेद और नसीर ने बताया कि सोमवार रात को पिंजरा लगाया गया। मंगलवार रात करीब आठ बजे बाघ बकरी की आवाज सुनकर पिंजरे तक पहुंचा और झपट्टा मारा। इसी दौरान पिंजरे का शटर तेज आवाज के साथ गिर गया, जिससे बाघ घबराकर भाग निकला। मौके पर उसके पगचिह्न भी मिले थे।
इसके बाद बुधवार रात बकरी पूरी रात पिंजरे में बंधी रही, लेकिन बाघ नहीं आया और कोई ताजा पगचिह्न भी नहीं मिले। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ अब भी गांव के आसपास घूम रहा है। वनकर्मियों की लगातार गश्त और लोगों की सतर्कता के चलते फिलहाल किसी मवेशी पर नया हमला नहीं हुआ है। सोमवार को ग्रामीण जव्वाद के घर से बकरी उठा ले जाने की घटना के बाद गांव में भय और बढ़ गया है।
दुधवा के बाघ विशेषज्ञ की निगरानी में बनी योजना
रेंजर अमरजीत प्रसाद ने बताया कि पिंजरे के पीछे से हमला होने के कारण शटर गिरने की आवाज सुनकर बाघ भाग गया होगा। बुधवार रात हल्की बारिश के कारण नहीं आया। बृहस्पतिवार को फिर बकरी बांधी गई और पिंजरे के आसपास बनाई गई मिट्टी व बालू की ट्रैकिंग पट्टी पर पगचिह्नों के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि पिंजरा लगाए जाने के बाद दुधवा नेशनल पार्क के बाघ विशेषज्ञ शत्रुघ्न लाल, उप प्रभागीय वनाधिकारी संतोष कुमार समेत अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर आगे की योजना तय की है।