बलरामपुर। यूरिया की किल्लत से जूझ रहे किसानों के लिए अब इंतजार खत्म होने वाला है। शासन ने बलरामपुर जिले को 2600 मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन कर दिया है, जो बृहस्पतिवार को जिले में पहुंच जाएगी। इसके बाद सहकारी समितियों पर वितरण सुचारू होने की उम्मीद है। बीते दिनों खाद की कमी से कई ब्लॉकों के किसान समिति चक्कर काटते रहे, कहीं टोकन के बावजूद खाद नहीं मिली तो कहीं सुबह से लाइन लगाने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा।
फिलहाल अभी किसानों काे समितियों में खाद तो दी जा रही है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में यूरिया न मिलने से किसान परेशान हैं। भाजपा के नेताओं ने भी खाद वितरण की व्यवस्था बेहतर करने की तैयारी की मांग जिलाधिकारी से की। भाजपा के जिला प्रभारी राहुल राज रस्तोगी ने बताया कि खाद की समस्या दूर करने के लिए शासन में भी वार्ता की गई है। वहीं सहकारी विभाग के सहायक निबंधक सहकारिता अमरेश मणि तिवारी ने बताया कि यूरिया का आवंटन मिला है, मंगलवार की शाम को आगरा तक खाद पहुंचने की लोकेशन मिली है। बुधवार की देर शाम तक खाद मिल जाएगी, जिसे बृहस्पतिवार तक 53 सहकारी समितियों को आवंटित की जाएगी। उन्होंने कहा कि खाद सभी को मिले, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
भोर से लाइन में लगीं महिलाएं लौटीं निराश
गैड़ास बुजुर्ग की साधन सहकारी समिति इटईरामपुर पर मंगलवार को सुबह पांच बजे से ही महिलाएं भूखी-प्यासी खाद के इंतजार में डटी रहीं। खलीकुन्निशा, निर्मला, प्रभावती, राज कली, शोभावती, राजपति, सुनील कुमार, कामता प्रसाद, रमेश कुमार, जमालुद्दीन व नवल किशोर ने बताया कि काफी इंतजार के बाद भी यूरिया नहीं मिली। गोदाम प्रभारी विजय मिश्रा ने कहा कि फिलहाल दो दिन पहले टोकन पाने वाले किसानों को ही खाद दी जा रही है। बुधवार को नया स्टॉक आने के बाद वितरण किया जाएगा। महराजगंज तराई ब्लॉक की सहकारी समिति कौवापुर में सोमवार को टोकन पाने के बावजूद खाद से वंचित रह गए किसानों को मंगलवार को 11 बजे से वितरण शुरू हुआ। समिति के सचिव अभिषेक सिंह ने बताया कि सभी टोकनधारक किसानों को अब यूरिया मिल रही है।
शिवपुरा और कोहड़ौरा में संकट गहराया
हरैया सतघरवा क्षेत्र की शिवपुरा और कोहड़ौरा सहकारी समितियों में भी खाद का संकट बरकरार है। किसान विनती राम, आज्ञा राम, सुरेश कुमार, विजय कुमार, रामप्रसाद, भैया राम व राघव राम ने बताया कि धान की फसल में इस समय यूरिया की सख्त जरूरत है, लेकिन खाद न मिलने से फसल बर्बाद होने का खतरा है। कई किसान धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं, फिर भी अब तक खाद उपलब्ध नहीं हो सकी है।