बलरामपुर। 452 वर्ग किलोमीटर में फैले सोहेलवा संरक्षित वन क्षेत्र का दायरा बढ़ने के बजाए सिकुड़ता जा रहा है। वन माफिया अवैध कटान करके वन क्षेत्र खोखला कर रहे हैैं।
संसाधनों के अभाव में वन विभाग अवैध कटान पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जंगली जानवरों का शिकार भी धड़ल्ले से हो रहा है। प्राकृतिक व वानस्पतिक रूप से समृद्ध तराई क्षेत्र का ये जंगल अपने अस्तित्व से जूझ रहा है।
इस वन क्षेत्र को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में है। वन क्षेत्र के विकास में बाधा बने वन माफिया बेखौफ होकर बेशकीमती पेड़ों पर आरी चला रहे हैं।
जिले की नेपाल सीमा पर स्थित सोहेलवा संरक्षित वन क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल करीब 452 वर्ग किलोमीटर है। वन क्षेत्र में करीब 20 हजार जैविक विविधताएं पाई जाती हैं। यहां साखू, सागौन, काले शीशम के साथ-साथ तमाम तरह की औषधीय वनस्पतियां भी पाई जाती हैं।
ये वन क्षेत्र रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतवास कहा जाता है। इस जंगल में तेंदुआ, चीतल, हिरन व बारहसिंगा समेत तमाम जानवर पाए जाते हैं। इसके अलावा इस वन क्षेत्र के प्राकृतिक जलाशयों में हर साल विदेशी परिंदे भी मेहमान बनकर आते हैं।
सोहेलवा संरक्षित वन क्षेत्र की हरियाली पर लगातार वन माफियाओं की आरी चल रही है। जंगल में आए दिन वन विभाग व एसएसबी द्वारा अवैध कटान की धरपकड़ से ये स्पष्ट होता है। जंगल के आसपास बसे गांवों के लोगों का जीवन भी जंगल पर ही आश्रित है। जलौनी के नाम पर प्रतिदिन तमाम लकड़ी काटकर ढोई जाती है।
खुली सीमा होने के चलते सोहेलवा सेंचुरी में भारतीयों के साथ-साथ नेपाली भी अवैध कटान व वन्यजीवों के शिकार में लिप्त हैं। करीब चार वर्ष पूर्व भांभर रेंज के एक वनकर्मी की अवैध कटान कर रहे नेपाली वन माफियाओं ने हत्या कर दी थी। कई बार नेपाली नागरिक जंगली जानवरों की खाल के साथ गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।
वर्ष 2011-12 में तत्कालीन एसपी जे रविन्दर गौड़ ने वन विभाग के साथ मिलकर 31 वन माफियाओं को सूचीबद्ध किया था। इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की तैयारी भी हो रही थी। इसी बीच एसपी का ट्रांसफर हो गया। जिसके बाद ये सूची कहां है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
सोहेलवा सेंक्चुरी को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव तीन बार केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन क्षेत्र की सुरक्षा चाक-चौबंद हो जाएगी। मगर ये प्रस्ताव अभी तक मंजूर नहीं हो सका है। प्रस्ताव मंजूर न होने से वन क्षेत्र में बाहरी अतिक्रमण जारी है।
डीएफओ बलरामपुर रजनीकांत मित्तल का कहना है कि सोहेलवा संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध कटान रोकने के सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सुरक्षा कर्मियों की टीम एसएसबी जवानों के साथ लगातार कांबिंग कर वन माफियाओं की धरपकड़ कर रही है। अवैध कटान पर प्रभावी अंकुश लगाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।