हल्दी। अजीत सिंह हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए क्षेत्राधिकारी बैरिया मो.फहीम ने बुधवार को पूरे दिन थाने पर कैंप किया। पूछताछ लिए चार लोगों को हिरासत में लिया। घटना के बारे में मझौंवा गांव के लोग कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। दूसरे दिन गांव में हत्या को लेकर दबी जुबान लोग चर्चा करते रहे। अजीत के टेंट हाउस में काम करने वाले मजदूरों से पुलिस ने घंटों पूछताछ कर जानकारी जुटाई। पुलिस पैसों के लेनदेन, कुर्सी का कवर बदलने का विवाद व अन्य एंगल से घटना के तार जोड़ रही है। रात में अजीत को फोन करने वालों का रिकाॅर्ड खंगाल रही है। इसमें सर्विलांस टीम की मदद ले रही है।
पत्नी से अंतिम बार बात करने के बाद गंगा घाट कैसे पहुंचा, यह हर किसी के सामने बड़ा सवाल है। स्थानीय लोगों की मानें तो हत्या करने के बाद आरोपियों ने शव पानी के ऊपर न आए, इसके लिए बाइक में टेंट के कपड़े से हाथ-पैर बांधकर गंगा में फेंका होगा। जिसके दरवाजे पर टेंट लगा था और विवाद को लेकर कई लोगों से पुलिस ने पूछताछ की। इस बाबत क्षेत्राधिकारी बैरिया मु.फहीम ने बताया कि पर्दाफाश के नजदीक पहुंच गए हैं। पुलिस टीमें अपना काम कर रही हैं।
जिस गंगा घाट पर मिला शव वहीं हुआ दाह संस्कार
हल्दी। अजीत सिंह का शव जिस गंगा घाट पर मिला, उसी घाट पर मंगलवार की शाम को अंतिम संस्कार हुआ। पोस्टमार्टम के बाद देर शाम शव पहुंचा तो परिजन चीत्कार उठे। सांत्वना देने वालों की आंखें भर आई थीं। पत्नी प्रियंका पति के हत्यारे पर कठोर कार्रवाई की गुहार लगा रही थी। उसकी हालत पागलों जैसी हो गई थी, कभी रो रही थी, तो कभी बेटे राजवीर को देख रही थी, मां की हालत देख यशवीर बिलख रहा था। मुखाग्नि इकलौते पुत्र राजवीर सिंह ने दी। शव को आग देते ही बड़े व छोटे भाई रोते हुए गिर पड़े। मित्र व रिश्तेदार उन्हें चुप कराते कराते खुद रोने लगे। घर से लेकर घाट तक पुलिस फोर्स तैनात रही।
अवनीश के सट्टे को लेकर तनाव में थे अजीत
अजीत का टेंट का बड़ा कारोबार था। एक दिन में तीन से चार शादी तिलक का सट्टा करते थे। परिजनों की मानें तो मझौंवा निवासी अवनीश की बहन की शादी 22 नवंबर को थी। इस सट्टे को लेकर अजीत काफी तनाव में थे। पिछले एक सप्ताह में अजीत व पीयूष के बीच 10 से 15 बार एक-एक दिन में फोन पर बात हुई है। पीयूष ने ही 80 हजार में सट्टा किया था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद स्वयं ही पैसा देने को कहा था।