बलिया। डाला छठ महापर्व के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को खरना व्रत रखा और शाम को रोटी खीर खाकर पारण किया। शुक्रवार को निर्जला व्रत रहकर डूबते सूर्य को अर्ध्य देंगी। शनिवार को उगते सूर्य को अर्ध्य देकर पारण करेंगी। इसकी तैयारी को लेकर नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक घरों में साफ-सफाई जारी है।
बृहस्पतिवार को नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों में लोगों ने फल, नारियल, सुपली, दउरी, गन्ना आदि की खरीदारी की। आलम यह रहा कि चौक क्षेत्र में भीड़ के कारण पैर रखने तक की जगह नहीं रही। यातायात व्यवस्था बाधित ना हो, इसके लिए नगर में जगह-जगह बैरियर लगाए गए थे और यातायात पुलिस मुस्तैद रही। इसके कारण जाम की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस मुस्तैद और च्रकमण करती रही।
बृहस्पतिवार को छठ का दूसरे खरना मनाया गया। महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रही और शाम को गुड़ निर्मित खीर, रोटी व फल से पारण किया। खरना का अर्थ होता हैं शुद्धिकरण। छठ का व्रत करने वाले व्रती महिलाएं नहाय खाय के पूरे दिन उपवास रखकर केवल एक ही समय भोजन करती हैं। अगले दिन खरना कर स्वयं को शुद्ध करती हैं। शुक्रवार को महिलाएं निर्जला व्रत रहेंगी और शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य देंगी। इसके बाद सप्तमी तिथि को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पारण करेंगी। बृहस्पतिवार को नगर में नारियल, अन्नानास, संतरा, नींबू, सुपली, दउरी, गन्ना, सेव, केला संतरा आदि की खरीदारी के लिए नगर में भीड़ उमड़ी रही।
घाट को अंतिम रूप देने में जुटे लोग
बलिया। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के तालाब, पोखरा, सरोवर, गंगा और घाघरा घाट पर विभिन्न समितियों द्वारा साफ-सफाई तथा वेदी बनाई गई और विद्युत उपकरण और प्रकाश आदि समुचित व्यवस्था की गई। बृहस्पतिवार को शहर में नगरपालिका की ओर से टाउन हाल, रामलीला मैदान, शनिचरी मंदिर, महावीर घाट की साफ-सफाई और बिजली सजावट की व्यवस्था की गई। इसके अलावा, नगर के लाट घाट, हाइड्रिल कालोनी, बहादुरपुर और नगर से सटे निधरिया, अगरसंडा, मिड्ढा के घाटों की साफ-सफाई और बिजली व्यवस्था प्रधानों की तरफ से कराई गई।