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UP: ऑक्सीजन नहीं मिलने से सांस की रोगी महिला की मौत, अस्पताल की गुल रही बिजली; जनरेटर में डीजल तक नहीं था

Thu, 24 Jul 2025 11:55 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुजुर्ग महिला की माैत हो गई। यहां लाइट कट जाने से महिला को ऑक्सीजन नहीं मिल पाया। इसको लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों में नाराजगी का माहाैल है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा। - फोटो : अमर उजाला
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Ballia News: बलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा में बुधवार की रात सांस की रोगी कृष्णमुनी पाठक (92) की ऑक्सीजन नहीं मिलने से मौत हो गई। बिजली कटौती के दौरान डीजल के अभाव में जनरेटर नहीं चलाया जा सका। इससे 300 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट व कंसंट्रेटर मशीन शोपीस बनी रही। अस्पताल की दुर्व्यवस्था के विरोध में परिजनों के अलावा क्षेत्रीय लोगों में गुस्सा है।

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दोकटी थाना क्षेत्र के बाबू के शिवपुर निवासी उदित पाठक अपनी माता कृष्णमुनी पाठक को सांस लेने में दिक्कत होने पर शाम करीब आठ बजे सीएचसी सोनबरसा लेकर पहुंचे। इस दौरान अस्पताल की बिजली गुल थी। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर अपने आवास पर थे। 

करीब 20 मिनट बाद डॉक्टर काजिम अली ने मरीज की जांच करने के बाद ऑक्सीजन देने के लिए कहा। लेकिन बिजली नहीं रहने के कारण ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन को चालू नहीं किया जा सका। इन्वर्टर की बैट्री भी डाउन होने पर डॉ. अपने आवास पर मरीज को लेक गए। एक मशीन से ऑक्सीजन देने का प्रयास किया। 

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इस दौरान जनरेटर भी चालू नहीं किया जा सका क्योंकि तेल नहीं था। जबकि अस्पताल में 300 एलपीएम का ऑक्सीजन प्लांट व 20 कंसट्रेटर मशीन उपलब्ध कराई गई है। मरीज की हालत गंभीर देख चिकित्सक ने जिला अस्पताल को रेफर कर दिया। उदित पाठक ने फोन कर 108 एंबुलेंस को बुलाया।

एंबुलेंस में मां को सुलाने के बाद ऑक्सीजन लगाने के दौरान मौत हो गई। उदित पाठक ने ऑक्सीजन के अभाव में मां की मौत होने का आरोप लगाया। कहा कि डीजल के अभाव में जनरेटर तक चालू नहीं हो सका। 

जनरेटर के डीजल को नहीं मिलता धन : सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि जनरेटर चलाने के लिए विभाग से डीजल का खर्च नहीं मिलता है। पैसा की मांग को लेकर सीएमओ को कई बार पत्र दिया गया है। रोगी कल्याण के मद में आने वाले धन से डीजल खरीद कर ओपीडी व इमरजेंसी में जनरेटर चलाया जाता है। महिला मरीज की हालत गंभीर देख इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर काजिम अली रेफर कर रहे थे, किंतु परिजन उन्हें ले जाना नहीं चाह रहे थे।
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