बलिया। समाज कल्याण विभाग ने जीवित दो बुजुर्गों को कागजों में मृतक घोषित कर उनकी वृद्धा पेंशन रोक दी।
तीन साल तक दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद दोनों ने शनिवार को तहसील पहुंचकर समाधान दिवस में एसडीएम देवेंद्र पांडे के समक्ष गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि हम जिंदा हैं फिर भी हमें कागजों में मार दिया गया, अब न्याय की उम्मीद आप से है।
नगरा ब्लॉक के करीमपुर बिहराहरपुर गांव निवासी कपिलदेव सिंह (75) और पंचानंद सिंह (65) ने बताया कि साल 2022 तक उन्हें नियमित वृद्धा पेंशन मिलती रही। इसके बाद भुगतान बंद कर दिया गया। जब उन्होंने जानकारी की तो पता चला कि समाज कल्याण विभाग की ऑनलाइन रिपोर्ट में कपिलदेव सिंह को 5 अप्रैल 2022 और पंचानंद सिंह को 8 अप्रैल 2022 को मृतक दर्शाकर फाइल निरस्त कर दी है।
दोनों बुजुर्गों ने ग्राम सचिव और नगरा ब्लॉक कार्यालय में कई बार चक्कर लगाया लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। अंततः शनिवार को दोनों पीड़ित ने गांव के अधिवक्ता अमरजीत सिंह के साथ तहसील पहुंचकर पत्रक देकर न्याय की गुहार लगाई। एसडीएम ने एडीओ समाज कल्याण नगरा को जांच कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि विभागीय लापरवाही साबित हुई तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
कपिलदेव सिंह ने कहा, हम जिंदा हैं, फिर भी हमें कागजों में मार दिया गया। अब न्याय की उम्मीद सिर्फ प्रशासन से है। पंचानंद सिंह ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर पेंशन बहाल नहीं हुई तो वे मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाने को मजबूर होंगे।
प्रभारी एसडीएम देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि वृद्धा पेंशन के आवेदनकर्ता को मृतक बता कर पेंशन रोकने की शिकायत मिली है।
मामला नगरा ब्लॉक का है। एडीओ समाज कल्याण को मामले की जांच कर जल्द ही वृद्धा पेंशन बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।