तब भाजपा ने पुराने दिग्गजों को किनारे कर युवा चेहरा आनंद स्वरुप शुक्ल पर दांव लगाया था, जो सफल भी रहा था। तब सपा ने अपने कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नारद राय का टिकट काट कर युवा चेहरा व नपा के पूर्व चेयरमैन लक्ष्मण गुप्ता को मैदान में उतारा था, लेकिन वोटरों ने सपा की बजाए भाजपा को तरजीह दी थी। लेकिन इस चुनाव में यही भाजपा के गले की हड्डी साबित हो रहा है।
पढ़ेंः बसपा ने जारी की एक और सूची, बलिया की सातों सीटों से प्रत्याशियों का एलान, देखें सभी के नाम
इस बार कई युवा चेहरे भी पार्टी से टिकट मांग रहे है। पिछले चुनाव में यह प्रयोग भले ही सफल रहा हो, लेकिन इस बार भाजपा के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। भाजपा के कई नेता इस सीट पर अपनी दावेदारी कर रहे हैं, जिससे इस सीट पर टिकट की घोषणा करने में पार्टी को पसीने छूट रहे है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो एक अदद टिकट के लिए दो दलों के दर्जन भर दावेदारों की खींचतान में बलिया नगर की सियासत उलझी हुई है।
कमोबेश यही हाल बैरिया विधानसभा का भी है। यहां भाजपा और सपा दोनों दलों में टिकट के लिए लंबी फेहरिस्त है। कोई जाति के आधार पर अपनी दावेदारी पेश कर रहा है तो पुराने रिकार्ड को आगे करके टिकट मांग रहा है। भाजपा से विधायक सुरेंद्र सिंह के अलावा करीब आधा दर्जन उम्मीदवार टिकट के लिए लखनऊ में डेरा डाले हैं तो सपा में भी दावेदार की लंबी कतार है।
सपा में टिकटों के लिए मजबूत दावेदारों के बीच चल रही इस रस्साकशी से पार पाना पार्टी आलाकमान के लिए आसान है। भाजपा की तरह सपा भी भंवरजाल में फंसी हुई नजर आ रही है। दो प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को लेकर कोई स्थिति स्पष्ट न होने से क्षेत्र में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
पढ़ेंः राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी के पास सिर्फ एक गाड़ी, मगर हैं करोड़पति, जानिए कितनी है कुल संपत्ति