घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। क्षेत्राधिकारी बैरिया मोहम्मद फहीम कुरैशी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घायल अशोक ठाकुर के बयान, घटनास्थल के साक्ष्य और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स की गहन जांच की। जांच के दौरान कई तथ्यों में विरोधाभास पाया गया, जिससे पुलिस का संदेह गहराता गया।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब गहन पूछताछ की, तो पूरा मामला खुलकर सामने आ गया। पूछताछ में रविंद्र ठाकुर ने स्वीकार किया कि विपक्षी पक्ष को फंसाने के इरादे से उसने ही अपने भाई अशोक ठाकुर के बाएं हाथ में गोली मारी थी।
दोनों भाइयों ने मिलकर यह साजिश रची थी, ताकि जमीन विवाद में चल रहे मुकदमे में विपक्षियों को कानूनी रूप से फंसा सकें। कट्टे के बारे में पूछे जाने पर आरोपियों ने बताया कि घटना के बाद उसे गंगा नदी में फेंक दिया गया। पुलिस अब हथियार की बरामदगी के प्रयास में जुटी हुई है।
क्षेत्राधिकारी मोहम्मद फहीम कुरैशी ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी। झूठे आरोप लगाकर निर्दोष लोगों को फंसाने का प्रयास किया गया, जिसे पुलिस की सतर्कता और सटीक जांच के चलते उजागर कर लिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों (रविंद्र ठाकुर और अशोक ठाकुर) को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।