बैरिया। सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन के पश्चिमी केबिन के पास रेलवे ट्रैक के नीचे बिछाए गया भूमिगत बिजली केबल बीते रविवार को फिर जल गया। इससे दियरांचल समेत 12 से ज्यादा गांवों की विद्युत आपूर्ति 30 घंटे से ज्यादा समय से ठप हो गई है। दो लाख की आबादी को इस लाइन से बिजली मिलती है।
बिजली निगम के लाइनमैनों ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो केबल की स्थिति देखकर उसे मरम्मत के लायक नहीं बताया। विभाग के अनुसार अब केबल बदलना ही एकमात्र विकल्प है। केबल जलने से दुर्जनपुर, हेमंतपुर, सुरेमनपुर, हनुमानगंज, नारायणगढ़, उपाध्यायपुर, चाई छपरा, विशुनपुरा, गोपालनगर, मानगढ़, वशिष्ठनगर, शिवाल मठिया समेत कई गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित है। बिजली निगम ने केबल बदलने की अनुमति के लिए पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी के संबंधित विभाग को करीब साढ़े दस लाख रुपये का भुगतान एक पखवाड़े पहले ही कर दिया है। इसके बावजूद अभी तक रेलवे की ओर से केबल बदलने की अनुमति नहीं मिली है।
केबल बदलने की अनुमति नहीं मिलने और पुराने केबल की मरम्मत संभव नहीं होने की जानकारी पर सुरेमनपुर, धरमबाग समेत आसपास के गांवों के लोगों में नाराजगी है। धरमबाग के कुछ ग्रामीण रेलवे ट्रैक के किनारे पहुंच गए और रेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसके बाद ग्रामीण ट्रैक पर बैठकर धरने पर भी बैठ गए। मौके पर मौजूद गेटमैन ने इसकी सूचना सुरेमनपुर के स्टेशन अधीक्षक पीआर पटेल को दी। स्टेशन अधीक्षक तत्काल मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाया। उन्होंने आश्वस्त किया कि केबल बदलने की अनुमति के लिए डीआरएम कार्यालय को मेमो भेजने के साथ ही अधिकारियों से बातचीत भी की जाएगी। जल्द अनुमति दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद ग्रामीण धरना समाप्त कर वापस लौट गए।
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केबल बदले बिना बिजली बहाल होना मुश्किल
बिजली निगम के कर्मचारियों के मुताबिक जले हुए भूमिगत केबल अब मरम्मत की स्थिति में नहीं है। ऐसे में केबल बदले बिना विद्युत आपूर्ति बहाल करना संभव नहीं है। रेलवे की अनुमति में देरी के कारण बड़ी आबादी को लगातार बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द केबल बदलवाकर बिजली आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है।