तीन साल तक मामले की सुनवाई लगातार चलती रही, लेकिन फैसला नहीं हुआ। इस दौरान प्रकरण में ग्राम सभा की ओर से लगातार पैरवी होती रही। वर्ष 2017 में वादी भोला नाथ मिश्र उच्च न्यायालय, इलाहाबाद चले गये। तब हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी को मामले का त्वरित निस्तारण का आदेश दिया।
इसके बाद तहसीलदार द्वारा मामले की लगातार सुनवाई के दौरान शनिवार को फैसला सुनाया गया, जिसमें सभी अवैध कब्जादारियों पर एक से डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना लगाने और जुर्माना राशि की वसूली का आदेश दिया है। अपने आदेश में तहसीलदार गुलाब चंद्रा ने स्पष्ट किया है कि जुर्माना राशि नहीं देने की स्थिती में आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाये।
इस मामले में राजस्व के सरकारी अधिवक्ता सम्पूर्णानंद दूबे और अंबरीश शुक्ला और विपक्ष की तरफ से अधिवक्ता बालेंदु कुमार ओझा राजू ने अहम भूमिका अदा की।