कमलेश यादव खार्तूम के इंडस्ट्रियल एरिया में आपरेटर का काम करते हैं। वहां सैकड़ों हिंदुस्तानी हैं। बताया कि बमबारी के बीच भूखे मरने की नौबत आ गई है। सबसे बुरी स्थिति स्थानीय लोगों की है। दुकानें आदि सब बंद है। पेट भरने के लिए लोग दुकानों और मॉल को लूट रहे हैं।
सूडान के खार्तूम में फैली हिंसा से बचकर किसी तरीके से अपने घर पहुंचे लोगों की आपबीती सुन लोगों के रौंगटे खड़े हो जा रहे हैं। वहां की सेनाओं के बीच चल रहा बमबारी के बीच लोगों को भूखे मरने की नौबत आ गई है। चारों तरफ लूट मची हुई है। पेट भरने के लिए आम लोगों को तो छोड़िए सेना भी दुकानों और मॉल को लूट रही है।
कमलेश यादव खार्तूम के इंडस्ट्रियल एरिया में आपरेटर का काम करते हैं। वहां सैकड़ों हिंदुस्तानी हैं। बताया कि बमबारी के बीच भूखे मरने की नौबत आ गई है। सबसे बुरी स्थिति स्थानीय लोगों की है। दुकानें आदि सब बंद है। पेट भरने के लिए लोग दुकानों और मॉल को लूट रहे हैं। यहां तक की सेनाएं भी यही काम कर रही हैं। निजी कंपनियों से भी वाहन आदि सामानों की लूट हो रही है। इन सबकों देख दूतावास से मदद की गुहार लगाई गई। ग्रुप बनाकर लोगों को एकत्र किया गया और वहां से निकला गया। निकलने वाली पहली बस को भी लूट लिया गया। किसी तरीके से वो लोग वहां से 22 अप्रैल को निकले। शिप से सउदी अरब और वहां से प्लेन से 26 अप्रैल को पहुंचे।