फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खाने व रहने का नहीं बचा ठिकाना तो पैदल निकल पड़े गांव जाने के लिए

विज्ञापन
विज्ञापन
बैरिया। खाने के लिए जेब में फूटी कौड़ी नहीं बचा, सेठ ने अपना खुद का उपाय करने के लिए कह दिया, मकान मालिक ने किराए का छप्पर छोड़ने का अल्टीमेटम भी दे दिया तो मऊ से पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। यह दर्द मऊ में फेरी लगाकर कपड़ा बेचने वाले 10 फेरीवालों की है जो पैदल ही बिहार राज्य के भागलपुर व कटिहार के लिए रेलवे ट्रेक के रास्ते गए। सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले मजदूरों की मानें तो दर्जनों की संख्या में रोज सुबह चार बजे भोर में और शाम छह बजे के बाद दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान आदि राज्यों से मजदूर रेलवे पटरी के रास्ते पैदल बिहार की तरफ जाते हैं। भूख और प्यास से परेशान यह मजदूर सुरेमनपुर स्टेशन पर कुछ देर आराम के दौरान चूड़ा, बिस्किट खाते हैं फिर चल पड़ते हैं।
विज्ञापन

बिहार राज्य के भागलपुर निवासी मुहम्मद रियाज, नूर मुहम्मद, मुहम्मद आलम, परवेज,मुस्तफा व कटिहार निवासी शौकत, अनवर व जावेद ने बताया कि भागलपुर का रहने वाला एक मुंशी हमें मऊ ले गया और कपड़े की फेरी के काम में लगाया। लॉकडाउन के बाद मुंशी ने कुछ दिनों के लिए खाने के लिए व्यवस्था की लेकिन अब हाथ खड़े कर दिए। शुक्रवार की देर शाम को सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे अधिकांश मजदूरों के पैरों में छाले पड़ गए थे। भूख से परेशान इन मजदूरों को रेलवे में काम करने वाले मजदूरों ने चूड़ा आदि खिलाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें