बलिया। जिले में वायु प्रदूषण मापने की कोई व्यवस्था नहीं है, न ही जिला प्रशासन ने इसके लिए कोई पहल की है। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भी व्यवस्था नहीं है। वर्षा मापी यंत्र के अलावा अन्य कोई व्यवस्था नहीं है। पिछले एक माह से वायु प्रदूषण के कारण सांस व हृदय रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। बिना मास्क के खुले में घूमना बीमारी को आमंत्रण देना हो गया है। कम इम्युनिटी वाले लोग गले में खराश, छींक के साथ सर्दी जुकाम व सांस की परेशानी की चपेट में आ रहे हैं।
जिले में ग्रीन फील्ड का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। शहर के दक्षिणी हिस्से में ददरी मेले का आयोजन चल रहा हैं। इसके कारण जिले की आबोहवा खराब हुई है। यूपी बिहार के सटे व तीन तरफ से नदियों से घिरे होने के बावजूद आजादी के 75 साल बाद भी जिले में वायु प्रदूषण मापने के लिए कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है। मापक यंत्र व विभाग न होने से प्रदूषण की सही जानकारी नहीं हो पाती है। मौसम की जानकारी के लिए पटना या गूगल से जानकारी लेनी पड़ती है। इस बाबत एडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि सदर तहसील सहित कई स्थानों पर वर्षा मापक यंत्र लगाए गए हैं। वायु प्रदूषण के मामले में पहल की जाएगी।
रोजाना आ रहे 20 से 25 मरीज
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पंकज झा ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में दीपावली बाद वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण मरीजों की संख्या में दो गुना इजाफा हुआ है। रोजाना सांस फूलने, गले में खराश व किडनी के 20- 25 मरीज आ रहे हैं। धुंध पड़ने पर मरीजों की संख्या 30-40 तक पहुंच जाती है। खराब वायु प्रदूषण को लेकर सचेत करने की कोई व्यवस्था जिले में नहीं है। इमरजेंसी में इन दिनों रोज पांच से दस गंभीर मरीज पहुंच रहे हैं, समय से इलाज न मिलने के कारण मौत भी हो रही है।