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अधिकतम तापमान भी गिरा, गलन भरी ठंड से लोग बेहाल

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बलिया। करीब दो हफ्ते से मौसम में उतार चढ़ाव हो रहा है। आसमान में रुक रुक कर बादल होने से कभी हल्की धुंध तो कभी धूप निकल रही है। चार-पांच दिनों पहले कई इलाकों में हुई बारिश व ओले पड़ने के कारण सोमवार से ही कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मंगलवार को तो अधिकतम तापमान जहां 17 डिग्री रहा वहीं न्यूनतम तापमान लुढ़क कर छह डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया।
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जनवरी महीने की शुरुआत से ही मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है और लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। पिछले कई दिनों से बिगड़े मौसम में कभी धूप तो कभी छांव हो रहा है। एक सप्ताह पहले बारिश के साथ कई स्थानों पर ओलावृष्टि भी हुई। हालांकि इसके बाद मौसम कुछ साफ हुआ लेकिन ठंड में कोई खास गिरावट नहीं हुई। सोमवार से कड़ाके की ठंड पड़ रही है और मंगलवार को सुबह से ही गलन भरी ठंड के कारण लोगों का हाल बेहाल रहा। सुबह में देर तक कोहरा व धुंध होने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। हवा की गति भी 11.5 किमी प्रति घंटा होने से ठंड के साथ ही गलन का असर पूरे दिन असर रहा। ठंड के कारण लोग बहुत जरुरी होने पर ही घरों से निकले। बाजारों में कहीं भी अलाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग खासकर चाय की दुकानों पर मौजूद भट्ठियों के आसपास शरीर को गर्म करते रहे।
सब्जियों के लिए प्रतिकूल है मौसम, रबी फसलों के लिए लाभदायक
मौसम में उतार चढ़ाव का असर फसलों पर भी पड़ सकता है। किसानों की मानें तो सबसे अधिक यह मौसम आलू व मटर के प्रतिकूल है। किसानों ने बताया कि वर्तमान में मटर की फलियां निकल रही हैं और इससे फूलों के गिरने से काफी नुकसान होने की संभावना है। बताया कि आसमान में रुक-रुक बादल होने के कारण जहां सरसों पर माहो प्रकोप होने की संभावना रहती है वहीं आलू की फसलों पर झुलसा रोग लगने का डर बना रहता है। इसके अलावा सब्जियों की अन्य फसलों के लिए भी यह मौसम अनुकूल नहीं है। उधर, गेहूं की खेती करने वाले किसानों ने राहत की सांस ली है। किसानों का कहना है कि ठंड से गेहूं, अरहर, मसूर, चना, गन्ना आदि फसलों को लाभ होगा।
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सरकारी अलाव और कंबल वितरण कागजों में
बांसडीह। इस भीषण शीतलहरी में ग्रामीण इलाके में न तो कहीं अलाव की व्यवस्था है और न ही कहीं कंबल वितरण हो रहा। इस मामले में उप जिलाधिकारी बांसडीह की भूमिका भी उदासीन है। कुछ गांवों में लेखपाल के माध्यम से थोड़ा-बहुत कंबल वितरण हो भी रहा है, वहां गरीब जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। ग्राम प्रधान अपने कुछ चुनिंदा लोगों में कंबल वितरण कराकर सरकार की मंशा और उद्देश्य की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कंबल वितरण का माकूल इंतजाम न होने की वजह से गरीब और जरूरतमंद लोग इस कड़कड़ाती ठंड में ठिठुर रहे हैं। लेखपाल और इस व्यवस्था से जुड़े लोग केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं। गांव के गरीब लोगों को पता भी नहीं है कि लेखपाल और ग्राम प्रधान ने कब कंबल का वितरण कराया। ग्रामीण जनकिया देवी,रामरती देवी, ललिता देवी, जगमोहन प्रसाद, सुखारी राजभर, रामजीत खरवार, गनपत राम, भगमनी देवी आदि ने कहा कि इस बार कंबल वितरण नहीं किया जा रहा है।
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