बलिया। जनपद में स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत खराब है। चिकित्सकों की कमी है। नरहीं, रेवती, मुरली छपरा, सोनवानी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारियों ने काम के बोझ के कारण मानसिक परेशानी का हवाला देकर सीएमओ को पद से मुक्त करने के लिए पत्र लिखा है।
स्वास्थ्य विभाग में कभी सीएचसी व पीएचसी प्रभारी बनने के लिए चिकित्सक सिफारिश करते थे। बांसडीह प्रभारी रहे डॉक्टर वेंकटेश मौआर की मौत के बाद हालात बदल गए हैं। कई स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी पद छोड़ना चाहते हैं। जिले के मुरली छपरा, रेवती, सोनवानी व नरहीं सीएचसी प्रभारी ने सीएमओ को पत्र लिखकर अधीक्षक पद के दायित्व से पद मुक्त करने की मांग की है। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा की कार्य की अधिकता के कारण काफी मानसिक दबाव है। हम सभी पारिवारिक जीवन एवं स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। जिसके कारण हम लोगों द्वारा अपने दायित्व का शत प्रतिशत निर्वहन नहीं हो पा रहा है।
लेवल-3 के तीन चिकित्सकों से कार्य न लेने का आरोप : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहतवार के चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर शशि प्रकाश ने छह अगस्त को सीएमओ बलिया को पत्र देकर अतिरिक्त प्रभार से मुक्त करने की मांग की। उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा कि अपने कार्यों के साथ-साथ एनसीडी कार्यक्रम हेतु नोडल अधिकारी नामित किया गया है। पूर्व से ही कार्यालय जिला प्रशिक्षण अधिकारी के समस्त कार्यों एवं सीएचसी सहतवार का अतिरिक्त प्रभार देखते हैं। इसके कारण एनसीडी जैसे महत्वपूर्ण कार्य की समीक्षा करने में कठिनाई हो रही है। वहीं, नियमित टीकाकरण जैसे प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है। जिले में वरिष्ठ चिकित्सा लेवल-3 के डॉक्टर सुमन मिश्रा, डॉक्टर बृजेश राय, डॉक्टर संदीप सिंह हैं। वे अपने पदभार के अनुसार काम नहीं करते। जबकि मैं लेवल-1 का चिकित्साधिकारी हूं। पत्र के माध्यम से एनसीडी कार्यक्रम के लिए लेवल-3 के चिकित्साधिकारी नामित करने की मांग की।