बलिया। जिले में पिछले चार दिन में न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री की गिरावट हुई है, गलन बढ़ गई है। इस स्थिति में ब्लड प्रेशर, शुगर, सांस और दिल के मरीजों को संयम बरतने की जरूरत है। थोड़ी सी लापरवाही से लोग हृदयाघात, लकवा और ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ रहा हैं।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी में पांच से आठ गंभीर मरीज रोज ऐसे लक्षण वाले इलाज को पहुंच रहे हैं। अस्पताल में आईसीयू वार्ड सहित अन्य संसाधन की कमी के कारण प्राथमिक इलाज के बाद चिकित्सक मरीजों को वाराणसी रेफर कर देते हैं। अस्पताल के फिजिशियन व स्टेमी वार्ड प्रभारी पंकज झा ने बताया कि दिल की बीमारी वाले लोगों के लिए ठंड और खतरनाक हो जाती है। ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिससे दिल को खून पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
हार्ट की समस्या वाले मरीजों को इमरजेंसी के स्टेमी वार्ड में गोल्डेन हावर में इलाज किया जा रहा है। राहत मिलने पर घर या वाराणसी को रेफर किया जाता है।
जिले के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ विनोद कुमार का कहना है कि इन दिनों हवा में नमी की कमी के कारण धूल और अन्य कण हवा में तैरते रहते हैं जो हमारे फेफड़ों में जाकर सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकते हैं। इससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल (प्लाक) के टूटने पर थक्का जमने की आशंका बढ़ जाती है, जिसकी वजह से दिल की बीमारी का खतरा तो बढ़ता ही है साथ ही