हल्दी। थाना क्षेत्र के नीरुपुर निवासी टेंट कारोबारी सुनील यादव हत्याकांड में गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई पुलिस कार्रवाई पर अदालत ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। तीन आरोपियों के खिलाफ मांगी गई रिमांड को अदालत ने खारिज कर दिया है। और विवेचना पर सवाल पूछे।
अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी-प्रथम एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट ने शनिवार को आरोपी पंकज राय, लक्ष्मी नारायण चौबे और श्रवण दूबे के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट में मांगी गई रिमांड अर्जी खारिज कर दी।
अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि पुलिस यह स्थापित नहीं कर सकी कि सभी आरोपी एक ही संगठित आपराधिक गिरोह के सदस्य हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि पुलिस ने जिन लोगों को एक गैंग का सदस्य बताते हुए गैंगस्टर एक्ट लगाया है, वे वास्तव में अलग-अलग और विरोधी गुटों से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि हत्या के मूल मुकदमे में दर्ज तथ्यों तथा पुलिस विवेचना से भी दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश और आपसी संघर्ष की बात सामने आती है। ऐसे में उन्हें एक ही संगठित गिरोह का सदस्य बताना कानून और तथ्यों के विपरीत है।
सुनील हत्याकांड में नामजद आरोपी है गैंगस्टर में शामिल आरोपी : नीरूपुर नई बस्ती निवासी टेंट कारोबारी सुनील यादव की हत्या के मामले में उनके पिता शिवशंकर यादव ने पुलिस को तहरीर में आरोप लगाया था कि 20 सितंबर 2025 की शाम पहले से रंजिश रखने वाले आरोपी एक स्कॉर्पियो वाहन से वहां पहुंचे और सुनील यादव पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी जिसमें उसकी मौत हो गई।
तहरीर में रेपुरा निवासी पंकज राय, सीताकुंड निवासी लक्ष्मी नारायण चौबे, नीरज चौबे, अजीत चौबे नीरूपुर निवासी श्रवण दुबे तथा चार अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। सभी आपराधिक और दबंग प्रवृत्ति के हैं और पहले से आपराधिक मामलों में सजायाफ्ता रहे हैं और जमानत पर हैं।
पुलिस इसी मुकदमा को आधार बनाकर सभी आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई की।