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कैमरों की नजर में रहेंगी मतगणना केंद्र की गतिविधियां

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बलिया। दस मार्च को विधानसभा चुनाव के मतों की गणना प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जाएगी, जिससे हर गतिविधि पर नजर रहेगी। प्रत्येक टेबल पर एक माइक्रो आब्जर्वर तैनात रहेंगे। माइको आब्जर्वर की ओर से अलग से निर्धारित प्रारूप 17-सी पर गणना टेबल पर लाई गई मशीन का नंबर, टेबल, चक्र व बूथ नंबर एवं प्रत्याशियों को प्राप्त मतों का विवरण नोट किया जाएगा।
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इस पर ईवीएम (कंट्रोल यूनिट) के गणना मेज पर आते ही गणना पर्यवेक्षक इसमें लगे एड्रेस टैग को उम्मीदवारों व गणना अभिकर्ताओं को दिखाया जाएगा। इसकी विधिवत जांच करेंगे। उसके बाद गणना अभिकर्ताओं को दिखाएंगे कि मतगणना टेबल पर लाई गई कंट्रोल यूनिट उसी बूथ नंबर की है। उसकी गणना इस टेबल पर की जानी है। कंट्रोल यूनिट के गणना मेज पर आने पर गणना पर्यवेक्षक की ओर से सीयू नंबर का मिलान कर मतपत्र लेखा 17 सी भाग- एक में अंकित नंबर से किया जाएगा। उसके बाद उम्मीदवारों और गणना अभिकर्ताओं को दिखाया जाएगा कि कंट्रोल यूनिट मतदान समाप्त होने के बाद सील उसी स्थिति में है और वही कंट्रोल यूनिट है, जिसका इस्तेमाल मतदान के लिए किया गया है। इसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। कंट्रोल यूनिट की जांच करने के बाद रिजल्ट खंड की बाहरी सील (एड्रेस टैग) हटाएंगे। ग्रीन पेपर सील पर लिखे नंबर को सुरक्षित रखते हुए हटाया जाएगा।
मतगणना को लेकर बढ़ी प्रत्याशियों की बेचैनी
बलिया। जिले की सात विधानसभा सीटों पर बीते तीन मार्च को मतदान के बाद मतगणना के इंतजार में अधिकांश प्रत्याशियों की रातों की नींद गायब हो गई है। प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ जीत-हार का गुणा-भाग करने में लगे हैं। मतदान के ऑकड़ों से उनकी धड़कनें बढ़ी हुई हैं। जिले की बलिया नगर, बैरिया, बांसडीह, सिंकंदरपुर, फेफना, रसड़ा और बेल्थरारोड (सुरक्षित) विधानसभा में तीन मार्च को मतदान हो चुका है। सातों सीटों पर 54.36 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। चुनावी मैदान में उतरे 82 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया। मतगणना का दिन जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है, वैसे-वैसे प्रत्याशियों की रातों की नींद भी गायब होती जा रही है। दिन तो किसी तरह कट जा रहा है, मगर रात नहीं बीत रही है। ऐसा इसलिए है कि उम्मीदवारों के समर्थक हार जीत का जो आंकड़ा लगा रहे है, वह कभी खुश कर देता है तो कभी गमगीन। कभी गांव के बूथ तो कभी शहर के बूथ से प्रत्याशियों को अच्छी खबर मिल रही है, तो कभी बुरी। इसलिए उम्मीदवार कभी विधायक बनने के सपने देखने
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लग जाते है, तो कभी अपने को वहीं खड़ा पाते हैं। राजनीतिक दलों से चुनाव लड़े प्रत्याशियों को धड़कनें तेज हैं। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को किस्मत फिलहाल स्ट्रांग रूम में रखी ईवीएम में कैद है। दस मार्च को मतगणना के बाद पता
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चलेगा कि किस प्रत्याशी को जनता ने चुना है।
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