बैरिया। सरयू और गंगा नदी के मुहाने पर रहने वाले लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए 98 करोड़ की स्वीकृत परियोजनाओं के लिए टेंडर की प्रक्रिया निरस्त कर दी गई है। इसके पीछे कारण है कि शासन स्तर से रेट निर्धारण में बदलाव किया गया है। इससे विभाग एकबार फिर स्वीकृत परियोजनाओं का एस्टीमेट बनाने में जुटा है।
गोपालनगर, शिवाल सहित सरयू व गंगा नदी पर 98 करोड़ रुपये से कटानरोधी कार्य के लिए परियोजनाओं को स्वीकृति मिली। विभाग के अनुसार स्वीकृति मिलने के बाद विभाग की तरफ से टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। 22 फरवरी को टेंडर खुलने वाला था। तब तक रेट में शासन की तरफ से बदलाव कर दिया गया। इससे टेंडर की प्रक्रिया निरस्त कर दी गई है। सिंचाई विभाग के अनुसार पहले शासन की तरफ से तय किया गया था कि सभी विभागों के लिए निर्माण सामग्री आदि का एक ही रेट रहेगा। अब शासन ने बदलाव किया है कि परियोजनाओं वाले स्थानों के मुताबिक हर विभाग का अलग-अलग रेट होगा। ऐसे में नया शासनादेश आते ही सिंचाई विभाग ने कटानरोधी परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी है।
स्वीकृत हुई थीं ये परियोजनाएं : सिंचाई विभाग की तरफ से गोपालनगर, गोपालनगर टाड़ी व शिवाल मठिया में कटानरोधी कार्य के लिए 600-600 मीटर लंबाई की तीन परियोजनाएं बनाई गई थीं। विभाग के अनुसार परियोजना के तहत 50-50 मीटर पर एक-एक गेम्पनर बनना है। उक्त तीनों प्रस्ताव पहले चरण में मुख्य अभियंता के समक्ष पेश हुए और तीनों प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई। दूसरे चरण में टीएलसी की बैठक में प्रस्ताव रखा गया। विभागाध्यक्ष ने गोपालनगर वाली परियोजना को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया। टाड़ी व शिवाल मठिया के लिए 600-600 मीटर की दोनों परियोजनाओं की लंबाई को आधी कर दिया। ऐसे में 300-300 मीटर की करीब पांच-पांच करोड़ की दो परियोजनाओं पर कार्य होना है।
छह करोड़ से बनेगा स्पर का नोज : दतहां में सरयू नदी पर बने स्पर के नोज की छह करोड़ से मरम्मत होगी। भोजछपरा में चार-चार करोड़ की रिवेटमेंट कार्य की दो परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं। इस परियोजना के तहत सरयू नदी के किनारे-किनारे पिचिंग होनी है। वहीं चांदपुर में पांच करोड़ से कार्य किया जाएगा।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता अशोक कुमार सिंह ने बताया कि शासन के तरफ से रेट निर्धारण नीति में बदलाव किया गया है। जिससे टेंडर की प्रक्रिया निरस्त कर दी गई है। नए सिरे से एस्टीमेट बन रहा है। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया होगी। मार्च माह के अंत तक सारी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, क्योंकि मार्च में कटानरोधी कार्य के लिए खाते में धन पहुंच जाएगा।