जनता को उम्मीद होती है कि प्रत्याशी उनके बीच का हो, जो उनका दुख-दर्द समझ सके। लेकिन इस बार जिले की छह विधान सभा सीटों पर करीब दस प्रमुख बाहरी उम्मीदवार हैं, जिनका नाम दूसरे विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है। केवल सिकंदरपुर विधान सभा में ही कोई बाहरी उम्मीदवार मैदान में नहीं है। बाहरी उम्मीदवारों को टिकट देने में बसपा को छोड़ कर सपा, भाजपा, सुभासपा और कांग्रेस ने खूब दरियादिली दिखाई है। उम्मीदवारों के गैर जनपद व दूसरी विधान सभा के होने के कारण इस बार चुनावी रण भी दिलचस्प हो गया है। अधिकांश सीटों पर बाहरी भीतरी का मुद्दा तेजी से उठाया जा रहा है।
बेल्थरारोड विधानसभा सीट वर्ष 2012 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां सपा गठबंधन के सुभासपा, भाजपा कांग्रेस व बसपा समेत अन्य दलों से 13 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें तीन उम्मीदवार बाहरी यानि दूसरे विधान सभा के हैं। इनमें एक तो गैर जनपद गोरखपुर के निवासी हैं। कांग्रेस से महिला उम्मीदवार गीता मूल रुप से रसड़ा तहसील के कुरेम गांव की निवासी हैं। जबकि भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे छठ्ठू राम सिकंदरपुर विधान सभा के नेहता सिवानकला के रहवासी हैं। सपा सुभासपा गठबंधन के प्रत्याशी हंसु राम गोरखपुर जिले के निवासी हैं। रसड़ा विधान सभा से सुभासपा उम्मीदवार महेंद्र चौहान मूल रुप से गाजीपुर जनपद के कासिमाबाद तहसील क्षेत्र के मरदह गांव के निवासी हैं। जबकि भाजपा के टिकट पर किस्मत आजता रहे बब्बन राजभर बेल्थरारोड विधानसभा के गाजियापुर सेमरी के निवासी हैं। फेफना से विधायक और योगी सरकार में मंत्री तथा भाजपा के उम्मीदवार उपेंद्र तिवारी बलिया विधान सभा के टैगेर नगर तो बलिया विधान सभा में बीजेपी के सिंबल पर चुनावी रण में उतरे भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर ने चुनाव आयोग को दिए शपथ पत्र में स्वयं को चोपड़ लखनऊ का निवासी बताया है। इसके अलावा बांसडीह में सपा के उम्मीदवार और नेता प्रतिपक्ष रहे रामगोविंद चौधरी भी मूल रुप से सिकंदरपुर विधान सभा के गोसाईपुर के निवासी हैं। जबकि बैरिया विधान सभा में भाजपा और सपा दोनों के उम्मीदवार गैर विधान सभा के हैं। भाजपा के प्रत्याशी आनंद स्वरुप शुक्ल बलिया विधान सभा के वाशिंदें है तो सपा के जयप्रकाश अंचल बेल्थरारोड के पशुहारी के रहने वाले हैं।
दस प्रत्याशियों को नहीं मिलेगा खुद का मत
जो उम्मीदवार अपने चुनाव क्षेत्र के निवासी हैं। वो तो आगामी तीन मार्च को अपने पक्ष मतदान कर लेंगे, लेकिन जो प्रत्याशी बाहरी हैं और अपनी सीट पर एक-एक वोट के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। सुबह से शाम तक गांव गांव भ्रमण कर एक-एक मत के लिए जनता से आशीर्वाद ले रहे हैं। ऐसे करीब दस प्रत्याशियों को खुद का वोट उन्हें नहीं मिल सकेगा।