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Ballia News: चक्की नौरंगा को कटान से बचाने के लिए सर्वे

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चक्की नौरंगा गांव में कटान रोकने के लिए ग्रामीणों के साथ विचार-विर्मश करते बाढ़ खंड के अधिशासी
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मझौवां। गंगा की धारा ने इस बार सबसे अधिक तबाही यूपी व बिहार की सीमा से सटे गांव चक्की नौरंगा में मचाई है। गांव को बचाने के लिए शासन स्तर से कवायद तेज कर दी गई है। गंगा की चार बार की बाढ़ में करीब 134 मकान नदी में विलीन हो चुके हैं। इसके अलावा सैकड़ों एकड़ जमीन भी गंगा की लहरों में समा गई है। कटान पीड़ितों की पीड़ा और आंखों के सामने बहती खुद की जमीन ने शासन-प्रशासन को आखिरकार हरकत में ला दिया है। मंगलवार को बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र के नेतृत्व में टीम ने ड्रोन कैमरों और तकनीकी उपकरणों के साथ चक्की नौरंगा गांव की कटान का सर्वे किया। इस दौरान बिहार प्रांत के भी अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों का मकसद यह जानना था कि आखिर नदी किस दिशा में, किस रफ्तार से गांव को निगलती जा रही है और किस तरह इसे रोका जा सकता है। उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों की संयुक्त टीमों ने जमीनी स्तर पर सर्वे किया। मौके पर गहन विचार-विमर्श के बाद दोनों प्रांतों के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कटान की भयावहता को देखते हुए जल्द ही एक ठोस कार्ययोजना (प्रपोजल) तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही कटानरोधी कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिए जाएंगे। जिम्मेदारों की तरफ से दावा किया गया है कि बचाव कार्य को समय से पहले पूरा करने की हरसंभव कोशिश की जाएगी ताकि भविष्य में गांव को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाया जा सके। अधिकारियों की इस पहल से चक्की नौरंगा के ग्रामीणों ने राहत की कुछ सांस ली है। चक्की नौरंगा के आगे बिहार में भी गंगा ने तबाही मचाई है।
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चक्की नौरंगा में कटान से भारी क्षति हुई है। इस उद्देश्य से सर्वे के लिए दोनों राज्यों के अधिकारी पहुंचे थे ताकि आगामी बाढ़ से पहले काम किया जा सके। जलस्तर कम हो रहा है। अब पहले जैसी कटान नहीं होगी। ड्राइंग बनाकर शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही कटानरोधी कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ विभाग, बलिया
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