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Ballia News: 44.8 करोड़ की कटान निरोधक परियोजना में सुस्ती पर भड़के अधीक्षण अभियंता

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मझौंवा क्षेत्र में चल रहे कटानरोधी कार्य का निरीक्षण करते बाढ़ विभाग के अ​धीक्षण अ​भियंता अशोक
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मझौवां। गंगा नदी की कटान से तटवर्ती गांवों को बचाने के लिए चल रही 44.8 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाओं में लापरवाही पर अधीक्षण अभियंता ने कड़ा रुख अपनाया है। निरीक्षण कर ठेकेदार को चेतावनी दी हे।
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अधीक्षण अभियंता अशोक कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र, एई श्रवण कुमार प्रियदर्शी समेत पूरी विभागीय टीम ने नौरंगा भुआल छपरा और चक्की नौरंग में बचाव कार्यों का निरीक्षण
किया। अधीक्षण अभियंता ने कार्यों की गति धीमी पाई। उन्होंने मौके पर ही मौजूद ठेकेदारों और संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि बोल्डर पिचिंग का कार्य हर हाल में निर्धारित पांच लेयर तक पूरा कराया जाए। बीच में छोड़े गए गैप को भरते हुए पार्कोपाइन विधि से मजबूत किया जाए। जियो बैग और डैम्पनर (कटर) का निर्माण एक सीध में कराया जाए, ताकि आगे-पीछे निर्माण होने के कारण नदी की धारा का दबाव किसी एक हिस्से पर केंद्रित न हो। दोनों तरफ 500-500 मीटर तक बचाव कार्य कर बीच का हिस्सा खाली छोड़ने पर एई और जेई से सख्त नाराजगी जताते हुए इसे तत्काल पूरी लंबाई में एकसमान रूप से कराने के लिए कहा। शनिवार को अमर उजाला की ओर से बाढ़ से बचाव, मियाद पूरी होने में 22 दिन शेष, अब तक 10 प्रतिशत ही हुआ काम...शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। इसके बाद सिंचाई विभाग और बाढ़ खंड संज्ञान लिया।
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अधीक्षण अभियंता ने ठेकेदारों को से कहा कि श्रमिकों की संख्या दोगुनी करें। कार्य को दिन-रात के शिफ्टों में लगातार कराया जाए। अधिकारियों के निर्देश पर तत्काल कार्यस्थल पर परियोजना से जुड़े सूचना बोर्ड भी लगवाए गए। अधिशासी अभियंता संजय मिश्र, सहायक अभियंता श्रवण प्रियदर्शी, जूनियर अभियंता अमरनाथ, राकेश रोशन के साथ ही जनप्रतिनिधि सत्या ठाकुर, राजमंगल ठाकुर, अभिनंदन ठाकुर मौजूद रहे।
-ग्रामीणों ने अधिकारियों को घेरा
विभागीय टीम के निरीक्षण के दौरान नौरंगा, दूबे छपरा और गोपालपुर के सैकड़ों ग्रामीणों ने अधिकारियों को मौके पर ही घेर लिया। ग्रामीणों ने शिकायत की कि ठेकेदार द्वारा पर्याप्त मजदूर और मशीनें नहीं लगाई गई हैं, जिससे परियोजना केवल कागजों पर दौड़ रही है। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि अगले 22 दिनों के भीतर युद्ध स्तर पर कार्य पूरा नहीं हुआ तो मॉनसून आते ही गंगा का कटान विकराल रूप धारण कर लेगा। ऐसी स्थिति में हजारों की आबादी बेघर हो जाएगी ।
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