शहर कोतवाली में बर्खास्त पुलिसकर्मी को भगाने को लेकर किए गए मारपीट के मामले में निर्दोष छात्रों को नाजायज तरीके से मुकदमे में फंसाने को लेकर शुक्रवार को चंहुओर पुलिस का विरोध हुआ। छात्रों ने कई स्थानों पर एक साथ पुलिस प्रशासन का पुतला दहन कर अपनी भड़ास निकाली।
वहीं जिले के अधिवक्ताओं ने पुलिस अधीक्षक को प्रस्ताव भेजकर अपना विरोध प्रदर्शित किया। यही नहीं उन्होंने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बर्खास्त पुलिसकर्मी को भगाने के नाम पर जिले के एक अधिवक्ता समेत 30 छात्रों के खिलाफ शहर कोतवाली में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
रात में शहर कोतवाली के मुंशी तथा संतरी को मारने-पीटने तथा कागजात फाड़ने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधिकारियों ने सभी आरोपियों का चालान कर दिया था। इस मामले में कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए अधिवक्ता उमेश प्रताप को तत्काल अंतरिम जमानत देते हुए रिहा कर दिया।
जबकि बाकी आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुक्रवार को जमानत दे दी। शुक्रवार की सुबह से ही पुलिस के खिलाफ छात्रों ने शहर के चौक तथा टीडी कॉलेज चौराहे पर पुतला दहन कर पुलिस अधिकारियों के प्रति अपने गुस्से का इजहार किया।
वहीं कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। तत्पश्चात आयोजित बैठक में पुलिस प्रशासन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए विरोध प्रस्ताव की प्रतिलिपि डीएम और एसपी को भेजी।
उधर क्रिमिनल बार एसोसिएशन, सिविल बार एसोसिएशन, कनिष्ठ अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने बैठक कर पुलिस कार्रवाई की निंदा की। इस मौके पर क्रिमिनल बार के अध्यक्ष सुभाषचंद्र श्रीवास्तव, गिरिजा शंकर सिंह, अरविंद सिंह, अजय शंकर, अजय कुमार सिंह, शक्ति प्रताप सिंह, राजेंद्र सिंह, भूपेंद्र सिंह, शक्तिनारायण, मनीष कुमार, संजय कुमार सिंह, मनीष कुमार सिंह, विनय कुमार सिंह, अमरेश यादव, संतोष कुमार सिंह, राजेश कुमार सिंह आदि शामिल रहे।