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आंधी-पानी ने फिर मचाई मचाई तबाही

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बलिया। जिले में रविवार की देर रात आई आंधी और बारिश से विभिन्न क्षेत्रों में काफी नुकसान पहुंचा। बैरिया में पेड़ की डाल टूट कर गिरने से तार टूट गया जिससे विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। चितबड़ागांव क्षेत्र में बिजली गिरने से दो गाय और एक बछड़े की मौत हो गई। इससे पहले रविवार की दोपहर सिकंदरपुर क्षेत्र के मालदह में बिजली गिरने से एक किशोर और एक किशोरी की मौत हो गई थी।
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जिले में रविवार को तो चक्रों में आंधी और बारिश हुई। जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र में रविवार की दोपहर बारिश हुई जिससे क्षेत्र में काट कर रखी गई गेहूं की फसल भीग गई थी। अन्य क्षेत्रों में मौसम ठीक था लेकिन रविवार की देर रात फिर जिले में आई आंधी बारिश से काफी नुकसान हुआ। जगह जगह पेड़ और पेड़ों की डालियां टूट कर गिर पड़ीं। धर्मापुर: चितबड़ागांव थाना क्षेत्र के ग्रामसभा धर्मापुर नवकापुरा में तेज आंधी के साथ बारिश के दौरान बिजली गिरने से हरिशंकर यादव की दो गाय तथा एक बछड़ा की मौत हो गई।
बैरिया: आंधी से आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। दीघार पावर हाउस व बैरिया विद्युत उपकेंद्र के बीच पेड़ की डाली विद्युत तारों पर गिर जाने से एचटी लाइन ब्रेक डाउन हो गया जिससे पूरे इलाकेे में बिजली की आपूर्ति बाधित है। एक माह में पांचवीं बार आंधी व बारिश ने मक्के की फसल को तहस नहस कर दिया है। इसके अलावा गेहूं के बोझ खेतों में भी गए हैं। बांसडीहरोड: एक सप्ताह से आसमान में बादल मंडरा रहे हैं और आए दिन कभी हल्की कभी तेज बारिश होने से खलिहानों में मड़ाई का काम प्रभावित है। बारिश के कारण प्याज की खेती भी चौपट होने लगी है। दया छपरा: वैशाख माह में रुक-रुक कर लगभग हर सप्ताह हुई बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालांकि बहुतेरे किसानों ने मौसम की नजाकत को देखते हुए किसी तरह मड़ाई का कार्य कर लिया लेकिन करीब 25 फीसदी किसानों के मड़ाई का काम नहीं हो सका है। आलम यह है कि बारिश के बाद किसान मड़ाई के लिए गेहूं के बोझ को खोलकर सूखाते हैं कि बारिश से फिर बोझ भीग जाते हैं।
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मड़ाई का कार्य ठप, सब्जी की खेती को नुकसान
बलिया। रबी की फसल की कटाई और मड़ाई को लेकर चैत्र-वैशाख का महीना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। पछुवा हवा चलने और मौसम साफ होने से किसान गेहूं की कटाई व मड़ाई का काम तेजी से करते हैं लेकिन एक माह में पांच बार आई आंधी-बारिश से किसानों के सामने संकट पैदा हो गया है। एक बारिश का पानी सूखता कि दूूसरी बारिश हो जा रही है। रविवार की देरशाम बारिश के बाद से ही खलिहानों में मड़ाई का काम ठप हो गया है। खेतों से प्याज निकालने का काम रुक गया। बारिश से प्याज व सब्जी की खेती को नुकसान पहुंचा है। हालांकि सोमवार को धूप होने से किसानों को उम्मीद जगी है लेकिन मौसम की बेरुखी को लेकर किसान चिंतित हैं।
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- अब तो गेहूं के बोझ के नीचे दीमक लगने शुरू हो गए हैं। गेहूं को बचाने के लिए रोज बोझ को इधर-उधर पलटना पड़ रहा है।- दीनानाथ वर्मा
- बारिश से नुकसान हुआ है। रोज बोझ पलटना पड़ रहा है। फिर बारिश हुई तो गेहूं के दाने पूरी तरह चौपट हो सकते हैं।- ओमप्रकाश मिश्र
- खेतों में मड़ाई के लिए रखे बोझ व भूसे भीग जाने के कारण पड़े हुए हैं। मौसम के बदलते रंग ने किसानों को संकट में डाल दिया है।- भरत सिंह
- बोहा ताल के करीब 10 फीसदी किसानों ने गेहूं की मड़ाई नहीं की है। बार-बार हो रही बारिश से गेहूं के बोझ भीग जा रहे हैं।- मिथिलेश सिंह
- एक तरफ लॉकडाउन तो दूसरी तरफ प्रकृति ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। बारिश से मड़ाई ठप है। सब्जी की खेती बर्बाद हो रही है।- सुधांशु तिवारी
- गेहूं के बोझ बारबार भीगने से दाने भी खराब होने लगे हैं। मड़ाई के बाद इस गेहूूं को जल्दी क्रय केंद्र वाले भी नहीं खरीदेंगे।- अमरजीत गुप्ता
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