अभिभावक के साथ स्कूल जाते मासूम
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ठंड के मददेनजर जिलाधिकारी ने कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यालयों का समय सुबह 10 बजे से भले ही कर दिया पर बच्चों को राहत मिलती नहीं दिख रही है। वजह कि अंग्रेजी माध्यम के कई स्कूल सुबह आठ बजे ही बसें भेज दे रहे हैं। इसके पीछे स्कूल प्रबंधन का तर्क यह है कि जो बस बच्चों को लेकर पहले एक घंटे में स्कूल आती थी, वह कोहरे के चलते डेढ़ से दो घंटे में आ रही है, इसलिए बसों को थोड़ा पहले भेजना मजबूरी है।
गत दिनों ठंड के मद्देनजर जिलाधिकारी ने कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यालयों के समय में परिवर्तन करते हुए विद्यालय खुलने का समय सुबह10 बजे से कर दिया था। लेकिन इसकी कोई खास राहत दूर-दराज से आने वाले बच्चों को नहीं मिल रही है। स्कूलों की बसें बच्चों को लेने के लिए सुबह आठ बजे ही आ जा रही है। ऐसे में बच्चे घने कोहरे और ठंड के बीच बस के इंतजार में सड़क पर खड़े रह रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जिला प्रशासन ने बच्चों को राहत जरूर दी है पर स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली से इसका लाभ बच्चों को नहीं मिल रहा है। कोई कैजुवलिटी होती है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा। इतनी ही ठंड में पड़ोसी जनपदों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
विजईपुर निवासी प्रिंस श्रीवास्तव ने कहा कि छोटे बच्चों के लिए यह ठंड नुकसानदायक है। अगर कोई भी अपना विद्यालय खोलता है तो कोई घटना होने पर स्कूल और जिला प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी। वहीं प्रोफेसर कालोनी निवासी अजीत कुमार ने बताया कि सबकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। कोहरे को देखते हुए स्कूल प्रशासन एक दो विषयों की कक्षाएं कम कर अपने स्तर से बच्चों को और राहत दे सकता है।