बलिया। उभांव थाना क्षेत्र में वर्ष 2014 में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में आठ साल बाद न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश फस्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय अरुण कुमार की अदालत ने कुल सात आरोपियों में छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। षड्यंत्र के आरोपी अरुण सिंह के खिलाफ दोषसिद्ध न होने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
ग्राम बासतराव बेलौली थाना मधुबन जिला मऊ निवासी परशुराम तिवारी व बिंदेश्वरी तिवारी 31 अगस्त 2014 को अपने पट्टीदार गिरीश तिवारी की बहू के दाह संस्कार में उभांव थाना स्थित श्मशान घाट गए थे। श्मशान घाट से दाह संस्कार के बाद दोनों घर जा रहे थे। अभी उक्त दोनों लोग उभांव थाना क्षेत्र के निकट नर्सरी के पास पहुंचे ही थे कि रास्ते में आरोपियों ने गोली मारकर दोनों की निर्मम हत्या कर दी थी। मामले में बिंदेश्वरी तिवारी के पुत्र आनन्द तिवारी ने उभांव थाना में तहरीर देकर अपने भाई और पिता के हत्या का आरोप में धनन्जय सिंह उर्फ बव्व्ल सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह, राजेश उर्फ चिंटू सिंह पुत्र योगेंद्र सिंह, अनूप सिंह पुत्र रविन्द्र सिंह व प्रवीण तिवारी उर्फ सोनू पुत्र बृजेश तिवारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान स्वामीनाथ तुरहा, सम्पूर्णानन्द यादव तथा अरुण सिंह का नाम विवेचक द्वारा मुकदमे में शामिल कर दिया गया। मामले में अभियोजन की तरफ से एक दर्जन गवाह प्रस्तुत किए गए। प्रकरण में बचाव पक्ष से वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश तिवारी, रणजीत सिंह, वीरेन्द्र सिंह व कौशल सिंह ने तर्क रखा, जबकि अभियोजन के तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुधीर कुमार मिश्र, वहीं वादी मुकदमा की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश तिवारी, प्रभात प्रकाश व अखिलेन्द्र चौबे ने अपना तर्क रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश फस्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय अरुण कुमार की अदालत ने कुल सात आरोपियों में छह आरोपियों को दोषी करार दिया है। सजा 25 अप्रैल को सुनाई जाएगी।