बलिया। 44 स्कूलों में नियम विरुद्ध नियुक्त 179 शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के मामलों की जांच एसआईटी ने तेज कर है। साक्ष्य जुटाने के लिए एसआईटी कभी भी छापा मार सकती है।
पिछले सप्ताह एसआईटी की ओर से संबंधित शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ी पत्रावली तलब की थी। डीआईओएस कार्यालय में फाइल नहीं होने के कारण संबंधितों की सूची और प्रधानाचार्यों की ओर से मुहैया कराए गए दस्तावेज एसआईटी उपलब्ध को करा दिए गए हैं। इसके अलावा विभाग की ओर से एसआईटी को कुछ अन्य सूचनाएं भी मुहैया कराने की तैयारी है। विभागीय सूत्राें का कहना है कि पत्रावली के अभाव में जांच कार्य प्रभावित हो रहा है, ऐसे में पत्रावली के लिए एसआईटी की टीम जल्द ही जिले में छापामार सकती है।
जिला विद्यालय निरीक्षक देवेन्द्र कुमार गुप्ता की तहरीर पर बीते 24 फरवरी 2024 को सदर कोतवाली पुलिस ने पूर्व डीआईओएस रमेश सिंह, संजय कुमार कुंवर लिपिक, लिपिक अजय सिंह, उर्दू अनुवादक मैनुद्दीन, प्रधान लिपिक शिवानन्द तिवारी पर मुकदमा दर्ज किया था। अब पत्रावलियों की बरामदगी के लिए एसआईटी की टीम स्थानीय पुलिस की मदद से छापामारी करने की तैयारी में है।
बता दें कि बीते वर्ष सितंबर माह में जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार गुप्ता ने शासन को पत्र लिख कर 44 स्कूलों के 179 शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति को अनियमित करार देते हुए वेतन भुगतान पर रोक लगा दी थी। इसमें चार प्रवक्ता, 80 सहायक अध्यापक, चार लिपिक, 10 सहायक लिपिक और 81 परिचारक शामिल हैं।
डीआईओएस ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को प्रेषित रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि जनपद बलिया के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों तथा संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक रमेश सिंह की ओर से फर्जी एवं अनियमित नियुक्ति कर राजकोष से भुगतान किया जा रहा था। रिपोर्ट में जिक्र किया था कि तत्कालीन डीआईओएस ने 32 इंटर कॉलेजों में अनियमित रूप से शिक्षक, सहायक लिपिक, परिचारकों एवं 12 संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में 58 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति कर राजकोष से करोड़ों रुपये का अवैध भुगतान लगातार किया।
नौ नवंबर 2023 के शासनादेश के बाद भी तत्कालीन डीआईओएस द्वारा तदर्थ शिक्षकों का भी वेतन भुगतान लगातार किया गया है। साथ ही रमेश सिंह द्वारा आउटसोर्सिंग से परिचाकों के भर्ती के शासनादेश लागू होने के बाद भी अनियमित तरीके से परिचारकों की स्थाई नियुक्ति की गई। इतना ही नहीं संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में प्राथमिक स्तर के (गैर अनुदानित) में भी अध्यापकों की नियुक्ति करके राजकोष से वेतन का भुगतान कराया गया।
मामले में शासन की ओर से नियुक्त एसआईटी की टीम ने जांच शुरु कर दी है। जांच के क्रम में एसआईटी की ओर से संबंधितों की पत्रावली मांगी गई थी, लेकिन पत्रावली के अभाव में टीम को उपलब्ध सूची और नियुक्ति से जुड़ी सूचनाएं मुहैया कराई गई है। साथ ही कुछ अन्य सूचनाएं एसआईटी को भेजी जा रही है।
-देवेंद्र कुमार गुप्ता, डीआईओएस, बलिया।