शेर-ए- पंजाब महाराजा रणजीत सिंह पंजाब के लोकजीवन और लोककथाओं में रचे बसे हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश का स्वर्ण मंदिर कहे जाने वाले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर को स्वर्णमंडित कराने में भी उनका उल्लेखनीय योगदान है।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा सन 1780 में करवाया गया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1853 में 22 मन शुद्ध सोने द्वारा शिखर को मंडित कराया और कलश स्थापित कराया।
महाराजा रणजीत सिंह पंजाब के लोक जीवन और लोक कथाओं में इस कदर रच बस गए हैं कि उनके नाम को अलग करना दूध से पानी को निकालने जैसा है। ब्रिटिश इतिहासकार जेटी व्हीलर ने लिखा था कि महाराजा रणजीत सिंह अगर एक पीढ़ी पुराने होते तो पूरे हिंदुस्तान को ही फतह कर लेते। वह पढ़े लिखे नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने राज्य में शिक्षा और कला को बहुत प्रोत्साहन दिया। उन्होंने पंजाब में कानून एवं व्यवस्था कायम की और कभी किसी को सजा ए मौत नहीं दी। वह सभी धर्मों का बराबर सम्मान करते थे।