बलिया। निशुल्क एवं बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत बड़ी संख्या में पात्र विद्यार्थियों का प्रवेश नहीं हो पा रहा है। क्योंकि कुछेक स्कूल अपने आप को बंद दिखा चुके हैं या कुछ विद्यालयों द्वारा नाम को लेकर भी खेल किया गया है।
प्राइवेट स्कूलों ने आरटीई के तहत गरीब बच्चों को दाखिला देने से बचने के लिए नया रास्ता तलाशा है। इसी चक्कर में आरटीई के पहले पर चरण में एक स्कूल में चयनित करीब 11 बच्चों अब प्रवेश नहीं हो सका है। चयनित बच्चों के अभिभावक स्कूल जाते है तो वहां के स्टाॅफ द्वारा यह कहा जाता है कि विद्यालय का नाम यह नहीं है। ऐसे में चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहा है।
इस साल पहली सूची में बच्चे को शामिल करने के लिए अभय शंकर ने अपनी बेटी कुमारी आयरा का फार्म ऑनलाइन जमा कराया था। स्कूल भी जो चुना उसमें उसका चयन भी हो गया। जब अभय चयन सूची और विभाग द्वारा उपलब्ध पत्र लेकर संबंधित स्कूल में गए तो वहां बताया गया कि बीएसए कार्यालय के पत्र और सूची में स्कूल का जो नाम लिखा गया है, वह हमारे स्कूल का नाम नहीं है। इसलिए हम प्रवेश नहीं दे सकते। अभय बताते है कि संबंधित विद्यालय में करीब 11 बच्चों का चयन हुआ है और विभागीय लापरवाही से सबका प्रवेश लंबित है।
शासन द्वारा आरटीई के तहत गरीब बच्चों को कान्वेंट स्कूलों में निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। हालांकि संबंधित स्कूलों को शासन द्वारा तय मानक के अनुसार पूरे साल की फीस दी जाती है, जिससे स्कूल प्रशासन अभिभावकों से मोटी रकम नहीं वसूल पाते हैं।आरटीई के तहत आरक्षित सीटें न भरनी पड़ें, इसके लिए जिले में कई स्कूलों ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाएं है।
इस संबंध में बीएसए मनीष कुमार सिंह ने बताया कि इसकी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसको दिखवाते हैं। विद्यालय के नाम के साथ-साथ यू-डायस कोड होता है। स्कूल के नाम में त्रुटि के चलते किसी चयनित बच्चे का प्रवेश नहीं रुकेगा।