बलिया। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर हर रविवार को लगने वाला मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला जिम्मेदारों की लापरवाही व उदासीनता की भेंट चढ़ता जा रहा है। कहीं पर अस्पताल में ताला लटका रहा तो कहीं चिकित्सक के अभाव में फार्मासिस्ट मरीजों का उपचार कर रहे हैं। आरोग्य मेला प्रभारी एसीएमओ डॉक्टर योगेंद्र दास ने बताया कि 81 स्वास्थ्य केंद्रों पर मेला का आयोजन हुआ, जिसमें 3344 मरीज का इलाज किया गया, 18 मरीज रेफर किया।
जिला मुख्यालय से 32 किमी दूर मेडवराकला गांव व आसपास के आधा दर्जन गांव की 15 हजार आबादी को सप्ताह में एक दिन भी चिकित्सक इलाज करने को नहीं आते है। फार्मासिस्ट राम भरोसे व वार्ड बाॅय के सहारे मरीजों का इलाज होता है। चिकित्सक के अभाव में मरीज को पांच किमी दूर बिहार के बक्सर इलाज को जाते हैं।
गर्भवती सुरक्षित प्रसव के लिए बक्सर पर आश्रित है। तमाम शिकायतों के वावजूद चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई। स्थानीय निवासी राम विलास ने बताया कि कम से कम सप्ताह के रविवार को दो घंटे के लिए भी चिकित्सक आते तो हमलोगों को काफी राहत मिलती है। बुजुर्गों को इलाज के लिए जाने में काफी परेशानी होती है।
चितबड़ागांव संवाददाता के अनुसार मौसम में बदलाव से बच्चों से लेकर बुजुर्गों की सेहत पर असर पड़ रहा है। कस्बा से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। क्षेत्र के करीब 50 हजार की आबादी के बीच स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित मेला में डॉक्टर की जगह फार्मासिस्ट ने दोपहर तक मरीजों का इलाज किया। इस दौरान चतुर्थ श्रेणी और चौकीदार मौजूद रहे।